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बद्रीनाथ धाम में घोटाले पर भड़के सीएम धामी: बोले- ‘यह गौहत्या और माता-पिता के वध जैसा महापाप, किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं सरकार’

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हरिद्वार। भू-वैकुंठ कहे जाने वाले मोक्षधाम श्री बद्रीनाथ मंदिर में दान-चढ़ावे और चंदे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब भारी राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील मामले पर अपना रुख बेहद कड़ा और सख्त कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को धर्मनगरी हरिद्वार में दोटूक शब्दों में साफ कर दिया है कि करोड़ों सनातनी हिंदुओं की अटूट आस्था के केंद्र बद्रीनाथ धाम में भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी छोटे या बड़े दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मामले की चौतरफा घेराबंदी करते हुए तुरंत प्रभाव से जांच समितियां गठित कर दी हैं।

मुरारी बापू की कथा में पहुंचे मुख्यमंत्री ने जताया गहरा क्षोभ, आस्था के साथ बताया विश्वासघात

हरिद्वार में आयोजित सुप्रसिद्ध कथावाचक मुरारी बापू की ‘श्रीराम कथा’ के पावन समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडियाकर्मियों से औपचारिक बातचीत में इस घोटाले को लेकर अपना गहरा क्षोभ और आक्रोश प्रकट किया। सीएम धामी ने बेहद भावुक और तल्ख लहजे में कहा कि चारधाम जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों के दान-चढ़ावे में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या गड़बड़ी करना एक अत्यंत गंभीर और अक्षम्य अपराध है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर भगवान और भक्तों की आस्था के साथ किया गया एक क्रूर विश्वासघात करार दिया।

घोटाले की तुलना महापाप से, एसआईटी और उच्चस्तरीय समिति को सौंपी गई जांच की कमान

मुख्यमंत्री ने अपनी बात को और कड़ाई से रखते हुए कहा कि देवभूमि के मंदिरों के पैसों पर डाका डालना सनातन शास्त्रों में बताए गए महापापों यानी गौहत्या और अपने स्वयं के माता-पिता की हत्या करने के समान एक भयंकर और घृणित जुर्म है। ऐसा घिनौना कृत्य करने वाले लोग समाज और कानून की नजर में कभी भी माफी के हकदार नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। एसआईटी हर एक बिंदु और वित्तीय दस्तावेज की वैज्ञानिक व गहनता से जांच कर रही है और उसकी अंतिम रिपोर्ट के आते ही दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो एक मिसाल बनेगी।

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गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी, बीकेटीसी अध्यक्ष का पीए निलंबित

ग्राउंड जीरो पर इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन भी कर दिया गया है। दूसरी ओर, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने भी मामले की सुगबुगाहट होते ही आंतरिक स्तर पर एक बड़ी और दंडात्मक प्रशासनिक गाज गिराई है। बीकेटीसी के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात व्यक्तिगत सहायक (पीए) प्रमोद नौटियाल को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से सस्पेंड यानी निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही आरोपी पीए के खिलाफ पुलिस थाने में नामजद एफआईआर भी दर्ज करा दी गई है।

पर्यटन सचिव ने दिए पंद्रह दिनों में रिपोर्ट सौंपने के आदेश, राज्य में मानसून को लेकर हाई अलर्ट

उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, नवनिर्मित उच्चस्तरीय जांच समिति बद्रीनाथ मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी, नकदी और ऑनलाइन दान से संबंधित सभी कथित अनियमितताओं का पूरा लेखा-जोखा खंगालेगी। समिति को आगामी पंद्रह दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और सख्त संस्तुतियां राज्य शासन को सौंपनी होंगी। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेश में सक्रिय हो चुके मानसून की तैयारियों पर भी बात की। उन्होंने जनता को अलर्ट करते हुए कहा कि राज्य में अगले दस दिनों तक कई पर्वतीय और मैदानी जिलों में भारी बारिश का ‘हाई अलर्ट’ जारी किया गया है। सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन के विभागों को २४ घंटे मुस्तैद रहने के कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि चारधाम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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