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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: लखनऊ में सीएम योगी बोले- पीएम मोदी ने धारा 370 हटाकर पूरा किया डॉ. मुखर्जी का संकल्प

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के पावन अवसर पर उन्हें भारत माता का महान सपूत बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी लखनऊ में आयोजित एक विशेष पुष्पांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। सीएम योगी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता करने वाली ताकतों को इतिहास ने हमेशा के लिए नकार दिया है, जबकि देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले राष्ट्रनायक आज भी जन-जन के दिलों में जीवित हैं।

शिक्षा जगत से लेकर सत्ता के गलियारों तक अमिट छाप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक महान शिक्षाविद और विजनरी राष्ट्रनायक थे। मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति जैसे गरिमामयी पद को सुशोभित करने वाले डॉ. मुखर्जी ने शिक्षा के स्तर को सुधारने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। देश की आजादी के बाद वे स्वतंत्र भारत के पहले खाद्य एवं उद्योग मंत्री बने और देश के औद्योगिक विकास की मजबूत रूपरेखा तैयार की। हालांकि, जब बात देशहित के बुनियादी सिद्धांतों की आई, तो उन्होंने नीतियों से समझौता करने के बजाय तत्कालीन केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए भारतीय जनसंघ की स्थापना की।

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अगर डॉ. मुखर्जी न होते तो भारत का हिस्सा न होता पश्चिम बंगाल

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि देश के विभाजन के कालखंड में जब तुष्टीकरण की नीतियों के चलते पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने की घिनौनी साजिशें रची जा रही थीं, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उस विभाजनकारी सोच के खिलाफ हिमालय की तरह मजबूती से खड़े हो गए। उन्होंने एक प्रचंड जन-आंदोलन खड़ा किया और बंगाल के एक बड़े हिस्से को भारत में रोके रखा। आज यदि पश्चिम बंगाल भारत का एक अभिन्न अंग बना हुआ है, तो इसके पीछे डॉ. मुखर्जी की वह ऐतिहासिक और दूरदर्शी भूमिका ही है, जिसे कृतज्ञ राष्ट्र कभी भी भुला नहीं सकता।

प्रधानमंत्री मोदी ने पूरा किया अधूरा संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अविभाज्य हिस्सा बनाए रखने के लिए डॉ. मुखर्जी ने वहां लागू दमनकारी परमिट व्यवस्था और विशेष दर्जे के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने ही ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का सिंहनाद किया था और इसी संकल्प को पूरा करने के प्रयास में उन्होंने कश्मीर की धरती पर अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। सीएम योगी ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए निरस्त करके वहां बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूल संविधान को पूरी तरह से लागू किया। इसके साथ ही देश ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस अधूरे और महान संकल्प को ऐतिहासिक रूप से पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता के लिए उनका समर्पित जीवन आने वाली हर पीढ़ी को प्रेरणा देता रहेगा।

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