नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में मौसम में बदलाव के साथ वायु प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन के मुकाबले रातें अब ठंडी होने लगी हैं, लेकिन हवा की गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 से ऊपर पहुंच गया है। वहीं, नोएडा के सेक्टर-62 में एक्यूआई 426 दर्ज किया गया। गाजियाबाद के कई इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर 300 के पार बना हुआ है। सड़कों पर निर्माण कार्य और उड़ती धूल को भी प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है।
दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में हवा की स्थिति गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। जहांगीरपुरी में एक्यूआई 450, आईआईटी दिल्ली में 453, अलीपुर में 422, आईटीओ में 421 और बवाना में 411 दर्ज किया गया।
इसके अलावा आनंद विहार में 302, अशोक विहार में 348, आया नगर में 382, बुराड़ी क्रॉसिंग में 393 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम क्षेत्र में 411 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों से राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नोएडा में सेक्टर-62 का AQI 426 तक पहुंचा
दिल्ली से सटे नोएडा में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। नोएडा के सेक्टर-62 में एक्यूआई 426 दर्ज किया गया। वहीं सेक्टर-150 में 351, सेक्टर-110 में 349 और सेक्टर-39 में 321 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया।
हालांकि सेक्टर-125 में एक्यूआई 243 और सेक्टर-116 में 261 दर्ज हुआ, लेकिन ये आंकड़े भी खराब श्रेणी में आते हैं। शहर के कई इलाकों में सड़क निर्माण और अन्य निर्माण गतिविधियां जारी हैं। निर्माण स्थलों के आसपास सड़कों पर जमा धूल वाहनों की आवाजाही के साथ हवा में फैल रही है, जिससे प्रदूषण की समस्या और बढ़ रही है।
गाजियाबाद में भी 300 के पार प्रदूषण
गाजियाबाद के विभिन्न इलाकों में भी वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लोनी में एक्यूआई 304, संजय नगर में 308 और वेव सिटी में 312 दर्ज किया गया। दिल्ली और नोएडा के साथ गाजियाबाद में भी लोग प्रदूषित हवा के बीच रहने को मजबूर हैं।
सड़क निर्माण और उड़ती धूल से बढ़ रही परेशानी
नोएडा में प्रदूषण बढ़ने के पीछे सड़क निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। शहर के कई हिस्सों में निर्माण कार्य जारी होने के कारण सड़कों पर धूल जमा है। वाहनों के गुजरने पर यह धूल हवा में फैलती है और वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और सड़कों की नियमित सफाई जैसे उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी माना जा रहा है।
अगले दिनों में और गिर सकता है रात का तापमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 4 से 9 नवंबर तक आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है। 4 नवंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 5 और 6 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसके बाद 7 नवंबर से तापमान में फिर गिरावट होने की संभावना है। 9 नवंबर तक न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए बढ़ा खतरा
प्रदूषण का मौजूदा स्तर स्वास्थ्य के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाला है। डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की प्रदूषित हवा का असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ सकता है। सांस लेने में परेशानी, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
मौसम में ठंडक बढ़ने और हवा की गुणवत्ता खराब रहने के बीच एनसीआर के लोगों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर रात का तापमान गिर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण का स्तर सामान्य होने के बजाय कई इलाकों में गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया है।

