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5 नवंबर पंचांग: दक्षिण दिशा में यात्रा से बचें, जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

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नई दिल्ली। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि रहेगी। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश और नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार दिन में अभिजीत मुहूर्त और रात में अमृतकाल शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। वहीं, राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल में नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। इस दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा, इसलिए दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की मान्यता है।

तिथि और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 5 नवंबर को सुबह 10:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे तक रहेगी।

सूर्योदय सुबह 6:38 बजे और सूर्यास्त शाम 5:42 बजे होगा। चंद्रोदय रात 2:49 बजे तथा अगले दिन चंद्रास्त दोपहर 3:11 बजे होगा।

अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल

5 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को दिन का विशेष शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्यों की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णय लेने को अच्छा माना जाता है।

वहीं, अमृतकाल रात 8:35 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसे ज्योतिष में शुभ और सकारात्मक समयावधि माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दौरान पूजा-पाठ, नए व्यापार से जुड़े कार्य और महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम करना शुभ फलदायी हो सकता है।

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय

पंचांग के अनुसार इस दिन राहुकाल दोपहर 1:33 बजे से 2:56 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

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यमगंड काल सुबह 6:38 बजे से 8:01 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए काम की शुरुआत और महत्वपूर्ण यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

गुलिक काल सुबह 9:24 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। मान्यता के अनुसार इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं।

इंद्र योग के बाद बनेगा वैधृति योग

5 नवंबर को सुबह 6:26 बजे तक इंद्र योग रहेगा। इसके बाद वैधृति योग प्रारंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में वैधृति योग को चुनौतीपूर्ण योग माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस योग में व्यक्ति को निर्णय लेने में असहजता या मानसिक बेचैनी महसूस हो सकती है। इसलिए इस अवधि में महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है।

स्वाति नक्षत्र में रहेंगे सूर्य देव

इस दिन सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में स्थित रहेंगे। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव और स्वामी राहु माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र का संबंध स्वतंत्रता, बदलाव और अपने तरीके से आगे बढ़ने की भावना से जोड़ा जाता है।

वहीं, सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना गया है। सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इस स्थिति को आत्मबल और निर्णय क्षमता पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है।

कन्या राशि में रहेंगे चंद्रमा

इस दिन चंद्र देव कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। कन्या राशि के स्वामी बुध हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कन्या राशि में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति को भावनाओं के बजाय तर्क और विश्लेषण के आधार पर सोचने के लिए प्रेरित करती है। इस दौरान छोटी-छोटी बातों पर अधिक विचार करने की प्रवृत्ति भी रह सकती है।

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दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल

गुरुवार को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

5 नवंबर 2026 के प्रमुख मुहूर्त और काल

विवरण समय
सूर्योदय सुबह 6:38 बजे
सूर्यास्त शाम 5:42 बजे
एकादशी समाप्त सुबह 10:35 बजे
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 से दोपहर 12:32 बजे
अमृतकाल रात 8:35 से 10:12 बजे
राहुकाल दोपहर 1:33 से 2:56 बजे
यमगंड काल सुबह 6:38 से 8:01 बजे
गुलिक काल सुबह 9:24 से 10:47 बजे
इंद्र योग समाप्त सुबह 6:26 बजे
दिशाशूल दक्षिण दिशा
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