मुज़फ़्फ़रनगर। बच्चों की परवरिश केवल उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाने और परीक्षा में अच्छे अंक लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सही-गलत की पहचान, जिम्मेदारियां निभाने और जीवन की चुनौतियों का सामना करना भी सिखाना जरूरी है। इसी सोच के साथ जानसठ रोड स्थित आशीर्वाद वेंकट में दून वैली और नचिकेता ग्रुप ऑफ स्कूल्स की ओर से मंगलवार को अभिभावकों के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में अभिभावकों के साथ बच्चों की बेहतर परवरिश, माता-पिता और बच्चों के बीच मजबूत बॉन्डिंग तथा बदलते डिजिटल दौर की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सत्र को संबोधित करते हुए दून वैली और नचिकेता ग्रुप ऑफ स्कूल्स के डायरेक्टर अनुराग सिंघल ने कहा कि बच्चों के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें केवल निर्देश देने के बजाय जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को समझाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरू से सही और गलत की पहचान कराना जरूरी है। इसके साथ ही उन्हें मासिक बजट तैयार करना, पैसे और जरूरतों की अहमियत समझना तथा सामाजिक कार्यक्रमों में सही तरीके से व्यवहार करना भी सिखाया जाना चाहिए।
अनुराग सिंघल ने डिजिटल युग में सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम के बढ़ते प्रभाव पर भी अभिभावकों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन उनका संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल दुनिया के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में समझाना चाहिए।
कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई। अनुराग सिंघल ने बताया कि दून वैली और नचिकेता ग्रुप की सभी शाखाओं को तकनीकी सुविधाओं से जोड़ा गया है। स्कूल परिसरों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कैमरों और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है तथा बच्चों के स्कूल आने-जाने की प्रक्रिया पर भी विशेष निगरानी रखी जाती है।
वहीं, वाइस प्रिंसिपल विक्की जैन ने कहा कि आज समाज के दबाव में माता-पिता बच्चों की सफलता को केवल हिंदी, अंग्रेजी और गणित में मिलने वाले अंकों से आंकने लगे हैं, जबकि जीवन की असली सफलता इससे कहीं बड़ी है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को परिवार के साथ चलना, रिश्तों को निभाना, जिम्मेदारियों को समझना और असफल होने के बाद दोबारा खड़े होकर नई शुरुआत करना भी सीखना चाहिए। जीवन में हर व्यक्ति को सफलता और असफलता दोनों का सामना करना पड़ता है और बच्चों को शुरुआत से ही इन परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करना जरूरी है।
विक्की जैन ने अभिभावकों से बच्चों को ध्यान से सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोगों की सुनने की क्षमता कम होती जा रही है, जबकि बच्चों को समझने के लिए सबसे पहले उन्हें ध्यान से सुनना जरूरी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को घर के छोटे-छोटे कामों में शामिल किया जाना चाहिए। इससे वे केवल अपनी मांगों पर ध्यान देने के बजाय जिम्मेदारियों को समझेंगे और जीवन में चीजों की वास्तविक कीमत भी जान सकेंगे।
सत्र में मौजूद शिक्षिका एवं अभिभावक पूजा शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आज के समय में पेरेंट्स और बच्चों के बीच की बॉन्डिंग कहीं न कहीं कमजोर होती जा रही है। ऐसे में इस तरह के इंटरेक्टिव कार्यक्रम अभिभावकों को बच्चों की सोच और जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों को यह संदेश दिया गया कि बच्चों की परवरिश में केवल पढ़ाई और अंक महत्वपूर्ण नहीं हैं। मजबूत पारिवारिक संबंध, संवाद, जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और सुरक्षित माहौल भी बच्चे के भविष्य को आकार देने में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

