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ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, 15 श्रद्धालुओं की मौत, 42 घायल; सिंधिया ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। नवरात्र के दौरान माता के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं पर शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे तेज रफ्तार ट्रक कहर बनकर टूट पड़ा। अनियंत्रित ट्रक ने सड़क किनारे स्थित प्रसाद की पांच दुकानों को रौंद दिया और मंदिर के मुख्य द्वार से टकराने से पहले दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 42 लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए झांसी रोड के सीएसपी को हटा दिया है और आठ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निलंबित किया है। वहीं, हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

हादसे की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार को जयारोग्य चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्होंने घायलों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और चिकित्सकों तथा अस्पताल प्रबंधन को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी। उनके साथ प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया और पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

सिंधिया ने पूछा, रात के अंधेरे में मंदिर तक कैसे पहुंचा ट्रक

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हादसे की परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शीतला माता मंदिर के समीप हुई दुर्घटना बेहद दर्दनाक है। इस घटना ने उन्हें भीतर तक दुखी कर दिया है, क्योंकि हादसे में उनके अपने शहर के परिवारों ने अपनों को खोया है। घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात के दौरान सिंधिया भावुक नजर आए।

सिंधिया ने कहा कि इस हादसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रात के अंधेरे में ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंच गया। ट्रक ग्वालियर कैसे आया और उसे मंदिर परिसर के इतने नजदीक तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के पीछे की तकनीकी वजह भी स्पष्ट होनी चाहिए। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि ट्रक के ब्रेक फेल हुए थे या हादसे के पीछे कोई अन्य कारण था।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और सख्त जांच कराने की जरूरत बताते हुए कहा कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए। यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री से तीन बार हुई चर्चा, जिम्मेदारों को नहीं बख्शने की मांग

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सिंधिया ने बताया कि हादसे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से तीन बार चर्चा हो चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से ग्वालियर आने का आग्रह भी किया है, ताकि स्थिति का जायजा लिया जा सके और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मिल सके।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की गंभीर घटना के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए। श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचे थे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई को इसी जवाबदेही के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारियों का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।

मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, सात दिन में रिपोर्ट देनी होगी

हादसे की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर की कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच की जिम्मेदारी अपर जिला मजिस्ट्रेट सीबी प्रसाद को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को घटना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की पड़ताल कर सात दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार, ग्वालियर जिले के आंतरी थाना क्षेत्र में स्थित शीतला माता मंदिर में नवरात्र की सप्तमी के दौरान यह दुर्घटना हुई। चीनौर रोड की ओर से आ रहा तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बनी प्रसाद की पांच दुकानों को रौंदता हुआ मंदिर के मुख्य द्वार से टकरा गया। इस दौरान वहां मौजूद श्रद्धालु ट्रक की चपेट में आ गए।

दुर्घटना में 15 श्रद्धालुओं की मौत हुई और करीब 42 लोग घायल हुए। गंभीर रूप से घायल लोगों को जयारोग्य चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। जिला प्रशासन ने घटना के सभी पहलुओं की जांच कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाया जा सके।

जांच में ट्रक के मंदिर तक पहुंचने की परिस्थितियों, मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों, यातायात प्रबंधन और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका सहित संबंधित पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। सिंधिया ने भी ट्रक के प्रवेश और तकनीकी खराबी को लेकर सवाल उठाए हैं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर और एसएसपी ने अस्पताल पहुंचकर लिया उपचार व्यवस्था का जायजा

कलेक्टर रुचिका चौहान ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के साथ जयारोग्य चिकित्सालय के ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों के उपचार की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि सभी घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार में किसी तरह की कमी न रहने दी जाए।

प्रशासन के अनुसार, करीब आठ गंभीर घायलों का ट्रॉमा सेंटर में विशेष उपचार किया जा रहा है। अन्य घायलों का भी अस्पताल में इलाज जारी है। जिला प्रशासन की ओर से घायलों के बेहतर उपचार और उनकी जरूरतों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

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हादसे के बाद अस्पताल में मृतकों के परिजनों और घायलों के परिचितों की भीड़ जुट गई। घटना से प्रभावित परिवारों के लिए यह बेहद कठिन समय है। प्रशासन की ओर से उपचार व्यवस्था की निगरानी की जा रही है, जबकि दुर्घटना के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।

सीएसपी हटाए गए, तीन थाना प्रभारियों समेत आठ पुलिसकर्मी निलंबित

ग्वालियर हादसे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस व्यवस्था में लापरवाही के आरोपों को लेकर कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर झांसी रोड के सीएसपी रवि भदौरिया को पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा तीन थाना प्रभारियों सहित आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

कार्रवाई की जद में झांसी रोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव, आंतरी थाना प्रभारी गीतेश शर्मा, झांसी रोड के यातायात थाना प्रभारी अभिषेक रघुवंशी, निरीक्षक यातायात राघवेंद्र जादौन, प्रधान आरक्षक सुशील द्विवेदी तथा आरक्षक किशन खन्ना, अनिल जैतपुरिया और पवन सेंगर शामिल हैं।

हादसे के बाद मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर सवाल उठे थे। श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी के बीच तेज रफ्तार ट्रक का मंदिर के नजदीक पहुंचना और वहां लोगों को कुचल देना सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा का विषय बन गया है। सरकार ने अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और कर्तव्य में लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।

मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक सहायता की घोषणा

मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी की है। राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को दो-दो लाख रुपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष से भी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। आर्थिक सहायता का उद्देश्य हादसे से प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाना है। मृतकों के परिवारों को अपूरणीय क्षति हुई है, जबकि घायलों और उनके परिजनों को उपचार तथा आगे की जरूरतों के लिए सहायता की आवश्यकता है।

मृतकों की पहचान, कई परिवारों में पसरा मातम

जिला प्रशासन के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी 15 लोगों की पहचान कर ली गई है। मृतकों में युवा, किशोर और वयस्क श्रद्धालु शामिल हैं। इनमें कई लोग ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के निवासी थे, जबकि कुछ मृतक श्योपुर, शिवपुरी और मुरैना जिलों से संबंधित थे।

मृतकों की सूची में सत्येंद्र सिंह गुर्जर, सरला तोमर, गौरव परिहार, महेश शर्मा, विमलेश, देवेश बघेल, प्रिंस उर्फ छोटू जाटव, शौर्य शर्मा, दिव्यांश कुशवाह, पवन राठौर, लव त्यागी, अमन त्यागी, अशोक त्यागी, हेमंत राठौर और नीतेश उर्फ रितेश के नाम शामिल हैं।

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प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, सत्येंद्र सिंह गुर्जर की उम्र 22 वर्ष थी और वह महलगांव के निवासी थे। सरला तोमर 50 वर्ष की थीं और राजीव नगर, गुढ़ा के हनुमान पहाड़ी क्षेत्र में रहती थीं। गौरव परिहार 18 वर्ष के थे और बड़ागांव खुरेरी के निवासी थे। महेश शर्मा 45 वर्ष के थे और श्योपुर जिले के सहसराम गसवानी क्षेत्र से संबंधित थे।

विमलेश 18 वर्ष के थे और शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र के महागावरा के निवासी थे। देवेश बघेल 17 वर्ष के थे और भितरवार के मावटा क्षेत्र में रहते थे। प्रिंस उर्फ छोटू जाटव 16 वर्ष के थे और ठाठीपुर के निवासी थे। शौर्य शर्मा 15 वर्ष के थे और श्योपुर के सहसराम क्षेत्र से संबंधित थे। दिव्यांश कुशवाह 17 वर्ष के थे और महेशपुरा, सिकंदर कंपू क्षेत्र में रहते थे।

पवन राठौर 23 वर्ष के थे और हजीरा के गदाईपुरा क्षेत्र के निवासी थे। लव त्यागी 15 वर्ष और अमन त्यागी 13 वर्ष के थे। दोनों मुरैना के निवासी बताए गए हैं। अशोक त्यागी 45 वर्ष के थे और ग्वालियर के सदर क्षेत्र में रहते थे। हेमंत राठौर शिवनगर, गदाईपुरा के निवासी थे, जबकि नीतेश उर्फ रितेश 18 वर्ष के थे और मेला ग्राउंड, दुल्लापुर क्षेत्र में रहते थे।

इन मौतों से कई परिवारों में मातम छा गया है। नवरात्र के दौरान माता के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ हुए इस हादसे ने सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजरें

शीतला माता मंदिर के पास हुए हादसे के बाद अब प्रशासनिक और पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रक अनियंत्रित कैसे हुआ और मंदिर के नजदीक तक पहुंचने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी या नहीं। ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। दुर्घटना के तकनीकी कारणों और संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

एक ओर घायलों का उपचार जारी है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के निलंबन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का खुलासा होता है।

नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर यह हादसा एक गंभीर सवाल छोड़ गया है। मंदिरों में भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी जैसे पहलुओं की समीक्षा आवश्यक हो गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

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