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योगी के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, इमरान मसूद बोले- हामिद अंसारी ने सनातन के खिलाफ क्या कहा? उदित राज ने नेहरू-अंबेडकर का दिया हवाला

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नई दिल्ली। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर की गई हालिया टिप्पणियों पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंसारी के बयान को भारतीयता, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए चिंताजनक बताते हुए सवाल उठाए हैं। योगी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस के नेताओं ने अंसारी का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री के आरोपों पर पलटवार किया है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस नेता उदित राज और कांग्रेस नेता आसिम वकार ने अलग-अलग प्रतिक्रियाओं में कहा कि अंसारी की टिप्पणी को सनातन परंपरा के अपमान के रूप में देखना उचित नहीं है। इस पूरे विवाद के बीच अंसारी की मूल टिप्पणी, योगी आदित्यनाथ की आपत्ति और कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

हामिद अंसारी की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में ए.जी. नूरानी की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का उल्लेख किया था। रिपोर्टों के अनुसार, अंसारी ने नेहरू के हवाले से कहा कि भारत के लिए वास्तविक खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है।

अंसारी ने इस संदर्भ में सांप्रदायिकता, नागरिक राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान से जुड़े सवालों पर भी बात की। उनके बयान के बाद भाजपा नेताओं और कुछ अन्य लोगों की ओर से आपत्ति जताई गई और इसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

योगी आदित्यनाथ ने बताया भारतीय संस्कृति के खिलाफ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में अंसारी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों को अपने सार्वजनिक बयानों में उन पदों की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

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योगी ने अंसारी के बयान को भारत, भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपरा के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि टिप्पणी के जरिए सनातन परंपरा का अनादर करने की कोशिश की गई है।

मुख्यमंत्री की आपत्ति के केंद्र में यह सवाल रहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए और सांप्रदायिकता की आलोचना करते समय धार्मिक समुदायों के बारे में किस तरह की भाषा इस्तेमाल की जानी चाहिए।

इमरान मसूद बोले- सनातन का अपमान कैसे हुआ?

योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हामिद अंसारी का बचाव किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अंसारी ने ऐसा क्या कहा जिससे सनातन परंपरा का अपमान माना जा रहा है।

इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने अंसारी के बयान में सनातन के खिलाफ कोई बात नहीं सुनी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी धार्मिक या सांप्रदायिक मुद्दों पर सवाल उठाए जाते हैं, तो उसे सनातन के अपमान से जोड़ दिया जाता है।

मसूद ने कहा कि अगर किसी समुदाय के खिलाफ हिंसा या धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है तो उस पर भी बात होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत फैलाने वाली राजनीति से समाज में तनाव पैदा होता है।

उदित राज ने नेहरू और अंबेडकर का दिया हवाला

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें हामिद अंसारी के बयान में सनातन परंपरा की आलोचना जैसी कोई बात नजर नहीं आई।

उदित राज ने कहा कि जिन मुद्दों का अंसारी ने उल्लेख किया, उन पर पहले भी जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव अंबेडकर विचार व्यक्त कर चुके हैं। उनके मुताबिक, इस बात को विशेष महत्व देना उचित नहीं है कि यह टिप्पणी करने वाला व्यक्ति मुस्लिम समुदाय से आता है।

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उदित राज ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक विवाद खड़ा करने के लिए मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों के बयानों को अलग नजरिए से देखा जाता है। यह उनका राजनीतिक आकलन है, जबकि इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की व्याख्या अलग-अलग है।

आसिम वकार बोले- अंसारी को समझने में हो रही गलती

कांग्रेस नेता आसिम वकार ने भी हामिद अंसारी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि अंसारी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग समुदायों के लोगों के साथ काम किया है और उपराष्ट्रपति के पद पर रहते हुए भी उन्होंने संवैधानिक व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

वकार ने कहा कि हामिद अंसारी की आलोचना को सनातनी हिंदुओं या हिंदू समुदाय के खिलाफ बयान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, अंसारी की आपत्ति उन लोगों और गतिविधियों से है जो अपराध, हिंसा और जाति-धर्म के आधार पर लोगों के बीच नफरत पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हामिद अंसारी के बयान को समझने में गलती कर रहे हैं और अंसारी की टिप्पणी का निशाना सनातन समाज नहीं, बल्कि सांप्रदायिकता और हिंसा की प्रवृत्तियां हैं।

बयान के राजनीतिक अर्थ पर बढ़ी बहस

हामिद अंसारी की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद अब केवल उनके बयान तक सीमित नहीं रहा है। भाजपा की ओर से इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संदर्भ में देखा जा रहा है, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सांप्रदायिकता की आलोचना को किसी धर्म या पूरे समुदाय के खिलाफ टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए।

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मामले में अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने भी अंसारी की टिप्पणी से दूरी बनाते हुए धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है।

सांप्रदायिकता और धार्मिक स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस

इस पूरे विवाद ने भारत में सांप्रदायिकता, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर बहस को फिर सामने ला दिया है। एक पक्ष अंसारी की टिप्पणी को ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति आपत्तिजनक मान रहा है।

फिलहाल कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा और विपक्षी दलों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना है।

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