मुज़फ़्फ़रनगर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले को लेकर अधिकारियों से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को रोकने के लिए मुज़फ़्फ़रनगर में पुलिस ने नाकों पर तैनाती की थी और कई सपा नेताओं को उनके घरों पर हाउस अरेस्ट किया गया था। इसी बीच मुज़फ़्फ़रनगर से सपा सांसद हरेंद्र मलिक पुलिस को चकमा देकर सहारनपुर पहुंच गए थे। अब सांसद ने खुद बताया है कि वह पुलिस की कड़ी निगरानी के बावजूद किस तरह मुज़फ़्फ़रनगर से निकलकर सहारनपुर पहुंचे थे।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए हरेंद्र मलिक ने अपने मुज़फ़्फ़रनगर आवास से सहारनपुर जाने का राज बताते हुए कहा कि इसमें पुलिस की ड्यूटी में कोई लापरवाही नहीं थी। सांसद के मुताबिक, पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी पर पूरी तरह मुस्तैद थे। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का निर्देश था, इसलिए उन्हें भी सहारनपुर जाना था।
सांसद ने बताया कि वह घर से निकलने के लिए सामान्य रास्ते का इस्तेमाल करने के बजाय छतों के रास्ते आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि कई छतें पार करने के बाद सीढ़ी के जरिए गली में पहुंचे और वहां से गाड़ी में बैठकर सहारनपुर के लिए रवाना हो गए। इस तरह पुलिस की निगरानी के बावजूद वह सहारनपुर पहुंचने में सफल रहे।
हरेंद्र मलिक के अनुसार, सहारनपुर पहुंचने के बाद उन्होंने एक सत्ता पक्ष के नेता के यहां रात बिताई और अगले दिन कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर अपना ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में पार्टी का पक्ष रखा था।
इस घटनाक्रम के बाद मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में एक दरोगा समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद यह सवाल उठा था कि जब सांसद को रोकने के लिए पुलिस की तैनाती की गई थी तो वह जिले से बाहर कैसे निकल गए।
अब सांसद हरेंद्र मलिक के बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी ड्यूटी में कोई लापरवाही नहीं बरती थी, बल्कि उन्होंने खुद निगरानी से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल किया।

