नई दिल्ली। ऑल इंडिया इमाम संगठन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है, लेकिन विरोध की मर्यादा और भाषा का स्तर बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री का अपमान केवल किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की गरिमा का भी अपमान है।
एक वीडियो संदेश जारी करते हुए इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि एक धार्मिक नेता होने के नाते समाज के प्रति उनकी भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को पूरी दुनिया ने देखा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन उसे शालीनता और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर किया जाना चाहिए।
‘सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं’
इमाम इलियासी ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों, वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों में आगजनी तथा तोड़फोड़ जैसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उनका कहना था कि सरकारी संपत्ति किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश की होती है, इसलिए उसे नुकसान पहुंचाना अंततः आम जनता के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून और व्यवस्था का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।
‘मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बड़ों का सम्मान जरूरी’
इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि किसी भी परिवार में मतभेद और विरोध स्वाभाविक होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बड़े-बुजुर्गों का अपमान किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के लिए जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा बड़ों का सम्मान करना सिखाती है और सार्वजनिक जीवन में भी मर्यादित भाषा का प्रयोग होना चाहिए। उनके अनुसार असहमति व्यक्त करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उचित नहीं कहा जा सकता।
‘प्रधानमंत्री देश के चुने हुए प्रतिनिधि हैं’
इमाम इलियासी ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश के लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री हैं और इस नाते उनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को विभिन्न देशों द्वारा मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों का उल्लेख करते हुए इस बात पर विचार करना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार की गरिमा बनी रहे।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग देखकर उन्हें दुख हुआ और इस प्रकार की घटनाओं से देश की छवि भी प्रभावित होती है। उन्होंने सभी नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।



