अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की ओर से हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे को लेकर दिए गए बयान का अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमानों के बीच भाईचारा और आपसी स्नेह भारत की पहचान है। देश की तरक्की के लिए दोनों समुदायों के बीच एकता और सद्भाव का बने रहना जरूरी है।
इकबाल अंसारी ने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की भावना को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे कर्मों के साथ सभी धर्मों का सम्मान भी होना चाहिए। उनके मुताबिक, मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता को लेकर जो बात कही है, वह सही है।
‘हिंदू-मुस्लिम भाईचारा बना रहा तो राष्ट्र करेगा प्रगति’
इकबाल अंसारी ने कहा कि भारत में हिंदू और मुसलमानों के बीच भाईचारा कायम रहना चाहिए। यदि दोनों समुदाय आपसी प्रेम और सम्मान के साथ आगे बढ़ेंगे तो देश भी तेजी से प्रगति करेगा।
उन्होंने कहा कि लोगों का सम्मान उनकी पहचान से नहीं, बल्कि उनके कर्मों से होना चाहिए। इंसान के काम अच्छे होने चाहिए और समाज में एक-दूसरे के धर्म का सम्मान किया जाना चाहिए।
अंसारी ने कहा कि देश की तरक्की के लिए आपसी सौहार्द और भाईचारे का माहौल जरूरी है। उन्होंने सभी लोगों से हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने की अपील की।
‘कर्म ही सर्वोपरि, जैसा बोएंगे वैसा काटेंगे’
इकबाल अंसारी ने अपने बयान में गीता और रामायण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में कर्म को महत्वपूर्ण बताया गया है और व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि इंसान को अच्छे कर्म करने चाहिए। उनके मुताबिक, समाज में किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके अच्छे कार्यों से होना चाहिए और यही संदेश धार्मिक ग्रंथ भी देते हैं।
अंसारी ने कहा कि समाज में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि देश में शांति और आपसी विश्वास का माहौल मजबूत हो।
विकास और रोजगार को आगे बढ़ाने की अपील
इकबाल अंसारी ने कहा कि हिंदू और मुसलमानों के बीच एकता को बढ़ावा देने के साथ देश के विकास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से देश की प्रगति, विकास और रोजगार को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि आपसी विवादों और मतभेदों से ऊपर उठकर समाज और देश के हित में काम किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, भाईचारा मजबूत होगा तो देश की तरक्की का रास्ता भी आसान होगा।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत ने दिया था बयान
दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता और धार्मिक विविधता को लेकर अपनी बात रखी थी। कार्यक्रम में 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
इस दौरान भागवत से संगठन के मुसलमानों को लेकर नजरिए के संबंध में भी सवाल पूछा गया। उन्होंने वर्ष 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई एक बैठक का जिक्र किया।
‘अगर कोई मुसलमानों को भारत में नहीं चाहता तो वह हिंदू नहीं’
मोहन भागवत ने 2018 की बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि उनसे उस समय पूछा गया था कि क्या हिंदू राष्ट्र की अवधारणा के तहत मुसलमानों को भारत से बाहर कर दिया जाएगा।
इस पर भागवत ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू होने की अवधारणा में सभी रास्तों को एक ही अंतिम सत्य की ओर जाने वाला मानना और प्रत्येक इंसान की गरिमा को स्वीकार करना शामिल है।
भागवत ने यह भी कहा कि इंसानों में कोई भेद नहीं है और सभी की अपनी गरिमा है।
धार्मिक विविधता के सम्मान पर जोर
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में धार्मिक विविधता के सम्मान और उसकी रक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। उन्होंने अलग-अलग धर्मों को एक ही अंतिम सत्य तक पहुंचने के अलग-अलग रास्तों के रूप में देखने की बात कही थी।
उनके इस बयान के बाद अयोध्या में इकबाल अंसारी की प्रतिक्रिया सामने आई है। अंसारी ने इसे सही बताते हुए हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को भारत की मजबूती और प्रगति से जोड़ा है।
अयोध्या से भाईचारे का संदेश
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से लंबे समय तक जुड़े रहे इकबाल अंसारी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब धार्मिक सद्भाव और अंतर-धार्मिक संवाद को लेकर बहस जारी है।
अंसारी ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता, धर्म के सम्मान और अच्छे कर्मों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को आपसी भाईचारे के साथ विकास, रोजगार और राष्ट्र की प्रगति के लिए मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
उनके इस बयान को अयोध्या से हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का संदेश देने वाली प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।



