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मध्य पूर्व संकट: 14वीं रात अमेरिकी हमले बंद, ओमान में वार्ता जारी; जेलेंस्की का दावा- ‘रूस दे रहा ईरान को खुफिया मदद’

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तेहरान/वाशिंगटन/कीव। पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हुई बातचीत के बाद यह उम्मीद जगी है कि क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में प्रगति हो सकती है। वहीं अमेरिकी सेना द्वारा लगातार कई दिनों तक की गई बमबारी के बाद पहली बार हमले रुकने की खबर ने भी हालात में कुछ राहत का संकेत दिया है। हालांकि हूती विद्रोहियों की आक्रामक गतिविधियों और यूक्रेन-ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को अब भी अस्थिर बनाए रखा है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ओमान के अधिकारियों ने शुक्रवार को तेहरान पहुंचकर ईरानी नेतृत्व के साथ कई दौर की वार्ता की। बातचीत का प्रमुख विषय होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री मार्गों को सुरक्षित और सामान्य रूप से संचालित करना रहा। दोनों देशों के बीच चर्चा सकारात्मक बताई जा रही है, हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है।

अमेरिका ने रोकी बमबारी, संघर्ष विराम की संभावनाएं बढ़ीं

ईरान और अमेरिका के बीच इस वर्ष फरवरी के अंत से जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बमबारी रोकने का फैसला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार तेरह रात तक ईरानी ठिकानों पर हमले किए, लेकिन चौदहवीं रात कोई सैन्य कार्रवाई नहीं हुई। इससे यह संकेत मिला कि दोनों पक्ष प्रत्यक्ष टकराव को सीमित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेंट्रल कमान (सेंटकॉम) ने आधिकारिक रूप से इस निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ओमान और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर राष्ट्रपति ट्रंप लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देश फिलहाल किसी ऐसे समाधान की तलाश में हैं जिससे सैन्य संघर्ष को आगे बढ़ने से रोका जा सके। कई मध्यस्थ देश भी दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने के प्रयास में जुटे हुए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद

तनाव का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देशों का अलग-अलग रुख है। ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर शुल्क लगाने की नीति पर कायम है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए इसका विरोध कर रहा है।

अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों के आसपास की जा रही निगरानी और नाकाबंदी के कारण ईरान की रणनीति को झटका लगा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

इसी बीच अमेरिकी सेंटकॉम ने दावा किया कि उसने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में दो अंतरराष्ट्रीय टैंकरों की जांच की। सेंटकॉम के अनुसार दोनों जहाजों को जांच के बाद आगे जाने की अनुमति दे दी गई, जबकि ईरानी बंदरगाहों की निगरानी और नाकाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी।

कैस्पियन सागर में हमले से यूक्रेन और ईरान आमने-सामने

समुद्री तनाव के बीच यूक्रेन और ईरान के संबंध भी तेजी से बिगड़ गए हैं। कैस्पियन सागर में ईरानी जहाज पर हुए हमले में एक नाविक की मौत और दूसरे के घायल होने के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर घटना पर विरोध दर्ज कराया और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख से बातचीत कर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है।

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उधर यूक्रेन ने स्वीकार किया है कि उसने रूसी जहाजों को निशाना बनाया, जिनके जरिए कथित रूप से ईरान को सैन्य सामग्री भेजी जा रही थी। यूक्रेन का आरोप है कि रूस मध्य पूर्व में ईरान के सैन्य अभियानों को समर्थन दे रहा है।

जेलेंस्की का दावा, रूस दे रहा ईरान को सैटेलाइट मदद

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस सैटेलाइट निगरानी के जरिए ईरान की सहायता कर रहा है। उन्होंने कहा कि जुलाई के शुरुआती दिनों में रूस ने खाड़ी क्षेत्र और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी की, जिनकी तस्वीरें बाद में ईरान तक पहुंचाई गईं।

जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका को ऐसे सबूत उपलब्ध कराए जाएंगे जिनसे यह स्पष्ट होगा कि रूस अमेरिकी सैन्य ठिकानों की गतिविधियों की जानकारी ईरान को दे रहा है। उनके अनुसार बहरीन, जॉर्डन और कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेसों की सैन्य गतिविधियों की तस्वीरें रूसी सैटेलाइटों द्वारा रिकॉर्ड की गई थीं।

हूती विद्रोहियों ने फिर बढ़ाया तनाव

यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों ने भी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के जिजान और यानबू स्थित अरामको की तेल सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। यह कार्रवाई सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा होदेइदाह बंदरगाह और कमरान द्वीप पर किए गए हमलों के जवाब में की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।

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कूटनीति और संघर्ष के बीच फंसा पश्चिम एशिया

एक ओर ईरान और ओमान के बीच बातचीत ने तनाव कम होने की उम्मीद जगाई है तो दूसरी ओर अमेरिका, यूक्रेन, रूस और हूती विद्रोहियों से जुड़े नए घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया का संकट अभी समाप्त होने से काफी दूर है। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य पर होने वाली वार्ताएं और अमेरिका-ईरान के रुख इस पूरे क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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