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अमेरिका का ईरान पर फिर बड़ा हमला, जवाब में जॉर्डन-बहरीन में ईरानी मिसाइलें; ट्रंप बोले- समझौते की जरूरत नहीं, होर्मुज पर अमेरिका का दबदबा

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वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। जुलाई में बनी अस्थायी शांति के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े इलाकों में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमलों की नई लहर शुरू की है। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन की आवाजाही के बीच कई देशों ने अपनी एयर डिफेंस प्रणालियां सक्रिय कर दी हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना की ताजा कार्रवाई में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठान, समुद्री सैन्य ठिकाने, संचार केंद्र और बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों और अमेरिकी सैनिकों के लिए पैदा हो रहे खतरे को रोकने के उद्देश्य से की गई।

होर्मुज को लेकर आमने-सामने आए अमेरिका और ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा टकराव की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को माना जा रहा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

अमेरिका का आरोप है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी की थी। अमेरिकी सेना ने इसी खतरे का हवाला देते हुए पहले 30 अगस्त को ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इन लॉन्चरों का इस्तेमाल समुद्री सुरंगें बिछाने के लिए किया जा सकता था।

अमेरिका का कहना है कि होर्मुज में समुद्री मार्ग को साफ रखने के लिए अमेरिकी सेना कार्रवाई कर रही है। वहीं ईरान ने अमेरिकी हमलों को आक्रामक कार्रवाई बताते हुए बदला लेने की चेतावनी दी है।

ईरान का जवाब, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए जाने का दावा किया। ईरानी पक्ष के अनुसार, ये हमले अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में किए गए।

जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई ईरानी मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से रोक दिया। शुरुआती रिपोर्टों में आठ मिसाइलों के इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में इससे अधिक संख्या के दावे भी सामने आए।

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बहरीन में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का ईरानी दावा सामने आया है। ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई का प्रमुख आधार बताते हुए जवाबी हमलों की चेतावनी दी है।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों के बड़े पैमाने पर मारे जाने के दावों को खारिज किया है। शुरुआती अमेरिकी आकलन के मुताबिक जॉर्डन में हुए हमलों में अमेरिकी ठिकानों पर किसी बड़ी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई थी।

ट्रंप का कड़ा रुख, बोले- ईरान से समझौते की जरूरत नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा सैन्य टकराव के बीच बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में है।

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिकी ठिकानों या हितों पर दोबारा हमला किया गया तो अमेरिका इससे कहीं अधिक कड़ा जवाब देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सिरिक में शादी समारोह पर हमले का ईरान का दावा

ईरान के दक्षिणी हिस्से में अमेरिकी हमलों के दौरान सिरिक क्षेत्र में एक शादी समारोह को निशाना बनाए जाने का आरोप भी सामने आया है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के मुताबिक, कुहस्तक इलाके में एक आवासीय घर में शादी का कार्यक्रम चल रहा था, तभी अमेरिकी हमले में वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार इस घटना में कई लोगों की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। ताजा ईरानी रिपोर्टों में कम से कम पांच लोगों की मौत और 63 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। ईरान ने इस घटना को अमेरिकी हमले का नतीजा बताते हुए इसे बर्बर कार्रवाई करार दिया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि हमले में महिलाएं और बच्चे भी प्रभावित हुए हैं।

अमेरिका ने किन ठिकानों को बनाया निशाना

CENTCOM के मुताबिक ताजा अमेरिकी अभियान केवल एक सैन्य प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं था। कार्रवाई में ईरान की एयर डिफेंस क्षमता, रडार सिस्टम, समुद्री सैन्य संपत्तियों, संचार ढांचे और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

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अमेरिका का तर्क है कि इन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना इसलिए जरूरी है ताकि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा पैदा न कर सके। अमेरिकी सेना पहले ही कह चुकी है कि वह समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक यातायात को जारी रखने के लिए क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है।

रूस की गुप्त मदद से ईरान बना रहा सुपरसोनिक मिसाइल

इसी बीच ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर एक और महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। फाइनेंशियल टाइम्स की जांच के मुताबिक रूस कथित तौर पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में गुप्त रूप से तकनीकी मदद दे रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार यह सहयोग वर्ष 2023 में शुरू हुआ था और इसका कोडनेम C430L बताया गया है। इस कार्यक्रम में रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल हैं। रूस ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में मदद कर रहा है, जो मिसाइलों को आवाज की गति से कई गुना तेज गति से उड़ने में सक्षम बना सकता है।

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक ईरान रैमजेट सिस्टम का विकास कर चुका है और इसका फ्लाइट टेस्ट भी किया जा चुका है। हालांकि अभी ऐसा प्रमाण सामने नहीं आया है कि रूस की मदद से तैयार कोई परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरान ने युद्धक रूप से तैनात कर दी है।

कम ऊंचाई और तेज रफ्तार बना सकती है बड़ा खतरा

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी अत्यधिक तेज गति और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता होती है। ऐसी मिसाइलों को पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए समय रहते पहचानना और रोकना अधिक कठिन हो सकता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल समुद्री जहाजों और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है। यदि ईरान इस क्षमता को बड़े पैमाने पर विकसित करने में सफल होता है तो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंधों और लंबे संघर्ष ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डाला है। दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता बढ़ रही है।

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रॉयटर्स के अनुसार अगस्त के अंत में होर्मुज को लेकर तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी, लेकिन नए सैन्य टकराव ने फिर से ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।

यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़े पैमाने पर समुद्री यातायात बाधित होता है तो इसका असर कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे एशिया, यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

जून का समझौता खत्म, फिर लौटी जंग की स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच जून में युद्धविराम और बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने की कोशिश हुई थी। इसके बावजूद स्थायी राजनीतिक समाधान नहीं निकल सका। जुलाई में दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियों में कुछ समय के लिए कमी आई, लेकिन होर्मुज और प्रतिबंधों को लेकर विवाद बना रहा।

30 अगस्त को लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले किए। इसके बाद सितंबर की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर व्यापक कार्रवाई की। इस तरह दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति का दौर एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव में बदल गया है।

आगे क्या, बातचीत या और बड़ा टकराव

अमेरिका और ईरान के बीच ताजा संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के खतरे में डाल दिया है। जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और क्षेत्र के अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के कारण किसी भी नए ईरानी हमले का दायरा बढ़ सकता है। वहीं अमेरिका की ओर से ईरानी सैन्य और समुद्री क्षमताओं पर लगातार हमले क्षेत्रीय तनाव को और गहरा कर सकते हैं।

सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यहां किसी बड़े सैन्य टकराव या समुद्री मार्ग के लंबे समय तक बाधित रहने की स्थिति में इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों से तत्काल तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई को ईरानी खतरे के जवाब के रूप में पेश कर रहा है, जबकि ईरान इसे आक्रामक हमला बताकर जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

 


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