Home » विविध इंडिया » डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: अंबाला में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बोले- कश्मीर से बंगाल तक अमिट है उनका बलिदान

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: अंबाला में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा बोले- कश्मीर से बंगाल तक अमिट है उनका बलिदान

Facebook
Twitter
WhatsApp

अंबाला। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, महान शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के पावन अवसर पर हरियाणा के अंबाला जिले में एक विशाल गौरव सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दीप प्रज्वलित कर डॉ. मुखर्जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा की धरा की सराहना की और इसे सांस्कृतिक, धार्मिक और खेलों में देश का नाम रोशन करने वाली पवित्र भूमि बताया। उन्होंने कहा कि आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसकी नींव में डॉ. मुखर्जी के विचार और उनका महान त्याग समाहित है।

सत्ता का मोह छोड़ हमेशा विचारधारा को सर्वोपरि रखा

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी राजनीतिक पदों को महत्व नहीं दिया, बल्कि उनके लिए देश और विचार हमेशा सर्वोपरि रहे। जब-जब राष्ट्रहित और सिद्धांतों की बात आई, उन्होंने बिना किसी संकोच के बड़े से बड़े पद का परित्याग कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. मुखर्जी ने जिस भारतीय जनसंघ रूपी छोटे से पौधे को रोपा था, आज वही विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर देश के 78 प्रतिशत भू-भाग पर सेवा कर रहा है।

पश्चिम बंगाल का अस्तित्व डॉ. मुखर्जी के जन आंदोलन की देन

अपने संबोधन के दौरान जेपी नड्डा ने देश के विभाजन के समय के एक ऐतिहासिक सच को उजागर किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सुहरावर्दी सरकार ने पूरे बंगाल को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की पूरी योजना बना ली थी और तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व भी इसके आगे घुटने टेक चुका था। ऐसे नाजुक मोड़ पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देशव्यापी जन-आंदोलन खड़ा किया और हुंकार भरी कि वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। आज जो पश्चिम बंगाल भारत का अटूट हिस्सा है, वह केवल और केवल डॉ. मुखर्जी की दृढ़ इच्छाशक्ति की वजह से है।

ALSO READ THIS :  रानी चटर्जी का धमाकेदार डांस, नेपाल शो में 'काटी रात मैंने खेतों में' पर थिरकीं भोजपुरी क्वीन

आत्मनिर्भर भारत की नींव और कश्मीर का ऐतिहासिक संकल्प

केंद्रीय मंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि वर्ष 1947 में जब वे देश के पहले औद्योगिक मंत्री बने, तो उन्होंने महज एक साल के भीतर 1948 में देश की पहली औद्योगिक नीति पेश की। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार कर रहे हैं, उसकी असली नींव डॉ. मुखर्जी ने उसी समय रख दी थी। इसके बाद वर्ष 1950 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक नारा दिया था कि ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’। उन्होंने कश्मीर की धरती पर जाकर संकल्प लिया था कि वे देश को एक संविधान दिलाएंगे या फिर अपना बलिदान दे देंगे।

चार पीढ़ियों का सपना प्रधानमंत्री मोदी ने किया पूरा

जेपी नड्डा ने भावुक होते हुए कहा कि वर्ष 1953 में डॉ. मुखर्जी के रहस्यमयी बलिदान के बाद देश की चार पीढ़ियों ने ‘जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है’ का नारा बुलंद किया। लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अदम्य इच्छाशक्ति और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति ने विवादित धारा 370 को हमेशा के लिए धराशायी कर दिया। आज डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत साकार हो चुका है और जम्मू-कश्मीर के भीतर भी पूरी तरह से एक विधान, एक प्रधान और एक निशान की व्यवस्था लागू है, जो इस महान राष्ट्रभक्त को देश की सबसे सच्ची और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि है।

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें