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बाबा नीम करोली महाराज की साधना भूमि ‘कैंची धाम’: सीएम धामी ने साझा किया वीडियो, दर्शन की अपील

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नैनीताल। उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों और शांत पहाड़ियों के बीच बसा श्री कैंची धाम आज देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह पवित्र आश्रम 20वीं सदी के प्रसिद्ध संत नीम करोली बाबा यानी महाराज जी की साधना और आध्यात्मिक कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है।

कैंची धाम की खासियत केवल इसका धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि यहां का शांत और प्राकृतिक वातावरण भी है। पहाड़ियों से घिरी घाटी में स्थित यह आश्रम उन श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है, जो आध्यात्मिक शांति और प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं।

लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र

कैंची धाम को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि बाबा नीम करोली महाराज के दरबार में आने वाला भक्त निराश होकर नहीं लौटता। इसी विश्वास के साथ देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

आश्रम परिसर में हनुमान जी का प्रमुख मंदिर है। बाबा नीम करोली महाराज स्वयं हनुमान जी के अनन्य भक्त माने जाते थे। यही वजह है कि कैंची धाम में हनुमान भक्ति और बाबा के प्रति श्रद्धा का विशेष संगम देखने को मिलता है।

मुख्यमंत्री धामी ने साझा किया कैंची धाम का वीडियो

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कैंची धाम की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक वीडियो साझा करते हुए श्रद्धालुओं से नैनीताल आने पर कैंची धाम के दर्शन करने की अपील की।

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मुख्यमंत्री ने कैंची धाम को बाबा नीम करोली महाराज की तपस्या की पवित्र भूमि और लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि पहाड़ों की शांत घाटियों में बसा यह धाम आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनोखा अनुभव देता है।

दो पहाड़ियों के बीच बना कैंची जैसा आकार

स्थानीय मान्यता के अनुसार यह धाम दो पहाड़ियों के बीच ऐसी घाटी में स्थित है, जहां सड़क के घुमावदार मोड़ कैंची के आकार जैसे दिखाई देते हैं। इसी वजह से इस स्थान को कैंची धाम नाम मिला।

भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित होने के कारण यह धाम नैनीताल आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।

1964 में हुई थी आश्रम की स्थापना

कैंची धाम आश्रम की स्थापना बाबा नीम करोली महाराज से जुड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 1964 में आश्रम का आधिकारिक उद्घाटन हुआ था। 15 जून 1964 को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कैंची धाम आश्रम का उद्घाटन किया गया।

उस समय यह इलाका आज की तरह प्रसिद्ध नहीं था। पहाड़ियों के बीच स्थित यह स्थान घने जंगल से घिरा हुआ था और यहां संत सोमवारी महाराज तथा प्रेमी बाबा साधना किया करते थे।

घने जंगल से आध्यात्मिक केंद्र तक का सफर

कहा जाता है कि बाबा नीम करोली महाराज जब इस क्षेत्र में आए तो उन्हें यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक वातावरण ने प्रभावित किया। इसके बाद स्थानीय निवासी पूर्णानंद द्वारा दान की गई भूमि पर आश्रम के निर्माण की शुरुआत हुई।

धीरे-धीरे यह स्थान बाबा के अनुयायियों और श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध होता चला गया। आज यही कैंची धाम देश-विदेश में बाबा नीम करोली महाराज के भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बन चुका है।

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प्रकृति और अध्यात्म का अनोखा संगम

कैंची धाम की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां का प्राकृतिक वातावरण भी शामिल है। चारों ओर पहाड़, हरियाली और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।

धाम में पहुंचने वाले लोग हनुमान जी के दर्शन करने के साथ बाबा नीम करोली महाराज को नमन करते हैं। कई श्रद्धालु यहां कुछ समय शांत वातावरण में बैठकर ध्यान और प्रार्थना भी करते हैं।

कैंची के आकार की घाटी में बसा आस्था का संसार, बाबा नीम करोली की साधना भूमि आज दुनिया भर के भक्तों को खींच रही

नैनीताल की पहाड़ियों के बीच स्थित कैंची धाम ने धार्मिक आस्था के साथ उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को भी नई मजबूती दी है। वर्ष 1964 में स्थापित यह आश्रम आज देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है।

बाबा नीम करोली महाराज की साधना, हनुमान भक्ति और पहाड़ों की शांत वादियों का संगम कैंची धाम को खास बनाता है। यही वजह है कि नैनीताल आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा में कैंची धाम का स्थान लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

 


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