रामपुर। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी बीच रामपुर के मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चल रही खींचतान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक क्षमता को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है।
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अकेले सरकार नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि केवल जुबान से कोई भी दावा किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी नहीं हैं कि कांग्रेस अकेले चुनाव जीतकर सरकार बना ले।
कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के दावे पर सवाल
मौलाना जमील हयात ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसी भी दल के लिए अकेले दम पर सरकार बनाने का दावा करना आसान है, लेकिन जमीनी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक कांग्रेस में अभी इतनी ताकत नहीं है कि वह अपने बलबूते पर सरकार बना सके।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे तथा गठबंधन की रणनीति को लेकर सार्वजनिक तौर पर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में भी दोनों दलों के नेताओं के बीच सीटों और चुनावी रणनीति को लेकर मतभेदों का उल्लेख किया गया है।
इमरान मसूद के बयान पर भी जताई नाराजगी
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के समाजवादी पार्टी को लेकर दिए गए बयान पर भी मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से मुसलमानों की राजनीतिक ताकत और एकजुटता कमजोर होती है।
उन्होंने कहा कि सभी लोगों को मिलकर अपना काम करना चाहिए। मौलाना ने कहा कि इमरान मसूद की ओर से कई बार काफी सख्त बयान सामने आते हैं और वह इन बयानों से सहमत नहीं हैं।
मौलाना जमील हयात ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन बयानबाजी ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज और राजनीतिक प्रक्रिया में संवाद बना रहे। उनका कहना था कि किसी भी वर्ग की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए।
मुस्लिम मुख्यमंत्री के चेहरे की मांग पर भी असहमति
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की उस मांग पर भी अपनी असहमति जाहिर की, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी से आगामी विधानसभा चुनाव में किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने की मांग की है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को पत्र लिखकर मुस्लिम मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा करने की मांग की थी। उन्होंने मुस्लिम आबादी के अनुपात का हवाला देते हुए राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात कही थी।
इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना जमील हयात ने कहा कि वह रजवी के बयान से सहमत नहीं हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम समाज को शांति और सुकून के साथ अपने अधिकार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बोले- ऐसे बयानों से विवाद की स्थिति पैदा होती है
मौलाना जमील हयात ने कहा कि किसी विशेष समुदाय के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे की मांग को इस तरह उठाने से समाज में विवाद और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं और धार्मिक लोगों को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए जिससे समाज में विभाजन की भावना पैदा हो।
उन्होंने कहा कि मुसलमान जिस स्थिति में हैं, उनके लिए जरूरी है कि उन्हें संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जो अधिकार हासिल हैं, वे मिलें। उनके मुताबिक समुदाय के हित में ऐसे मुद्दों को उठाया जाना चाहिए जिनसे लोगों को वास्तविक लाभ मिल सके।
हिंदू नेताओं के सहयोग का भी किया जिक्र
मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने कहा कि मुस्लिम समाज को केवल इस आधार पर किसी नेता या पार्टी को नहीं देखना चाहिए कि वह किस धर्म से आता है। उन्होंने कहा कि अगर उनके क्षेत्र में विधायक और सांसद हिंदू हैं, तो कई बार वे मुस्लिम समाज के लोगों के काम भी करवाते हैं और उनकी समस्याएं सुनते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि हिंदू नेता मुस्लिम समाज की बात नहीं सुनते। उनके मुताबिक कई हिंदू नेता मुस्लिमों की समस्याओं को सुनते हैं और उनके साथ सहयोग भी करते हैं।
शहाबुद्दीन रजवी के बयान को बताया गलत
मौलाना जमील हयात ने अंत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग वाले बयान पर अपनी असहमति दोहराई। उन्होंने कहा कि वह इस बयान को सही नजरिए से नहीं देखते हैं और ऐसी बयानबाजी से समाज में अलगाव की भावना पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और सामाजिक प्रतिनिधियों को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे समाज के लोगों को वास्तविक राजनीतिक और सामाजिक लाभ मिल सके। उनके मुताबिक किसी समुदाय के हितों की बात करते समय सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत और बयानबाजी के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से चर्चा में है। हाल के दिनों में दोनों दलों के नेताओं की ओर से सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर अलग-अलग रुख सामने आए हैं।

