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आतंकियों का ‘मुजफ्फरनगर कनेक्शन’! बुढ़ाना मदरसे में ली थी आतंकियों ने तालीम, खुफिया विभाग ने खंगाला रिकॉर्ड

Muzaffarnagar Madrasa Link in Ahmedabad Terror Arrests
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मुजफ्फरनगर। गुजरात के अहमदाबाद में खुफिया विभाग ने 9 नवंबर को तीन संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। इनमें से दो आजाद सुलेमान शेख (20 वर्ष, निवासी: कैराना, जिला शामली) और मोहम्मद सुहेल सलीम खान (23 वर्ष, निवासी: सिंगाही टाउन, जिला लखीमपुर खीरी) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना कस्बे के एक मदरसे से जुड़े पाए गए।

तीसरा आरोपी चीन से शिक्षित डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद (35 वर्ष, निवासी: हैदराबाद) भी गिरफ्त में है।

 

आतंकी साजिश का खुलासा

गिरफ्तारियों से एक बड़े आतंकी प्लॉट का पर्दाफाश हुआ। आरोपी रिसिन नामक घातक जहर (कास्टर बीन्स से बनाया गया) तैयार कर रहे थे। यह जहर इतना खतरनाक है कि एक मिलीग्राम मात्रा भी मौत का कारण बन सकती है।

खुफिया विभाग को शक था कि आरोपी दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद में हमलों की योजना बना रहे थे। गिरफ्तारी के बाद अहमदाबाद के पास दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा पिस्टल, 30 जिंदा कारतूस और 4 लीटर कास्टर ऑयल बरामद हुआ। आरोपियों का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISIS से जुड़े होने का संदेह है।

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‘दाऊद मदरसे’ से तालीम का कनेक्शन

आजाद सुलेमान ने 2018 में बुढ़ाना के मोहल्ला मुस्तफाबाद स्थित मदरसा दाऊद अरबीया दारुल उलूम अजीजिया में एडमिशन लिया। वह दो साल तक तालीम हासिल करता रहा। कोरोना काल (2020) में महामारी के कारण मदरसा छोड़कर चला गया।

वहीं, सुहेल ने तीन महीने पहले (अगस्त 2025 के आसपास) एडमिशन लिया। वह डेढ़ महीने तालीम हासिल करने के बाद 4 नवंबर 2025 को पिता की बीमारी का बहाना बनाकर मदरसे से चला गया। दोनों की तालीम अब जांच का केंद्र बनी हुई है।

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खुफिया टीम का मदरसे पर छापा

गिरफ्तारियों के बाद खुफिया एजेंसियां मुजफ्फरनगर पहुंचीं। उन्होंने बुढ़ाना मदरसे पर छापा मारा। रिकॉर्ड खंगाले गए। मदरसा संचालक मौलाना दाऊद से पूछताछ की गई। टीम ने दोनों छात्रों की जन्म तिथि, एडमिशन डिटेल्स और अन्य कागजात चेक किए।

मौलाना दाऊद ने ‘The X India’ को बताया, “ATS टीम आई थी। उन्होंने कागजात चेक किए। आजाद तीन-चार साल पहले पढ़कर चला गया। सुहेल पिछले साल से था, लेकिन 5 तारीख से छुट्टी लेकर गया।”

टीम ने जांच पूरी कर वापस लौट गई।

 

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मदरसे की पृष्ठभूमि

मदरसा दाऊद अरबीया दारुल उलूम अजीजिया लगभग 20 वर्ष पुराना है। यहां करीब 200 बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं। यह एक सामान्य धार्मिक शिक्षा केंद्र है, जहां कुरान और अरबी की पढ़ाई होती है। लेकिन अब इसकी छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

शामली के कैराना और लखीमपुर खीरी के सिंगाही से आने वाले दोनों युवा ‘दीनी’ शिक्षा ले रहे थे। परिवारों ने दावा किया कि वे निर्दोष हैं।

सुहेल की मां रुकसाना ने कहा, “मेरा बेटा हाफिजा पढ़ रहा था। वह कभी गलत काम में नहीं फंसा।” 

 

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परिवारों का दावा और जांच का दायरा

सुहेल के परिवार ने कहा कि वह निर्दोष है। उसके पिता सलीम और छोटा भाई वसीम मैकेनिक हैं। शामली में आजाद के परिवार ने भी कहा कि वह टेलर है। खुफिया विभाग अब दोनों के बैकग्राउंड की गहन जांच कर रहा है। दिल्ली ब्लास्ट और अन्य घटनाओं से लिंक की पड़ताल हो रही है।

लखीमपुर खीरी एसएसपी संकल्प शर्मा ने कहा, “सुहेल का बैकग्राउंड चेक हो रहा है।” 

 

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राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल

यह घटना उत्तर प्रदेश के मदरसों पर नजर बढ़ाने का संकेत देती है। गुजरात ATS ने कहा कि आरोपी रेडिकल थे और विदेशी हैंडलर से संपर्क में थे। मुजफ्फरनगर जैसे संवेदनशील इलाके में यह खबर सनसनी फैला रही है। स्थानीय लोगों ने कहा, “मदरसा पुराना है, लेकिन जांच जरूरी है।”

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