मुज़फ़्फ़रनगर। बुढ़ाना तहसील क्षेत्र में बंजर सरकारी जमीन को लेकर विवाद अब मुख्यमंत्री से शिकायत तक पहुंच गया है। मौजा बुढ़ाना बांगर उत्तरी की जमीन को लेकर शिकायतकर्ता जरगाम ने कुछ लोगों पर कथित कब्जे की कोशिश और तहसील के अधिकारियों-कर्मचारियों पर उनकी मदद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर बुधवार दोपहर करीब 12:30 बजे शहर के रुड़की रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई और निष्पक्ष जांच के साथ कार्रवाई की मांग की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार पुराने खसरा नंबर 1933 और वर्तमान गाटा संख्या 1340 की बंजर भूमि को पुराने गाटा नंबर 1995 और नए गाटा नंबर 1336ख की भूमि बताकर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। आरोप है कि इसके लिए जमीन की पैमाइश में भी गड़बड़ी की जा रही है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सही केंद्र बिंदु से पैमाइश करने के बजाय करीब दो किलोमीटर दूर से पैमाइश की गई, जिससे जमीन की लंबाई में करीब 50 से 55 मीटर का अंतर पैदा हो गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित गलत पैमाइश का फायदा उठाकर निजी लोगों को जमीन पर कब्जा और निर्माण का रास्ता दिया जा रहा है।
पहले भी हटाए जा चुके हैं कथित अवैध कब्जे
शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी जमीन को दूसरे गाटा नंबर की भूमि बताकर पहले भी कई बार कब्जे किए गए थे। शिकायतों के बाद तहसील और चकबंदी विभाग की संयुक्त टीमों ने मौके पर पैमाइश की और कथित अवैध निर्माण हटाए गए।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि गाटा संख्या 1933 में कुछ लोगों के कथित कब्जे को लेकर तहसीलदार बुढ़ाना की ओर से धारा 67 के तहत कार्रवाई की गई और बेदखली के आदेश भी जारी किए गए।
बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिकायतकर्ता ने हल्का लेखपाल प्रताप सिंह समेत तहसील से जुड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उसका दावा है कि पहले की गई शिकायतों और कानूनी कार्रवाई के कारण उससे रंजिश रखी जा रही है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी गैरमौजूदगी में कथित रूप से पैमाइश कराई गई और वर्तमान पैमाइश की रिपोर्ट व नक्शा-नजरी भी उसे उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
शिकायत में लेखपाल के साथ हुई कथित बातचीत का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बातचीत के दौरान उसे शिकायतों पर कार्रवाई न होने और जमीन संबंधी मामलों की जांच लंबित रखने की बात कही गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी और व्यस्तता का फायदा उठाकर विवादित जमीन पर निर्माण की तैयारी की जा रही है। उसके मुताबिक मौके पर सफाई कराने के साथ ईंटें आदि मंगाई गईं और निर्माण शुरू करने का प्रयास किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और मौके की सही पैमाइश नहीं हुई तो सरकारी जमीन पर कथित कब्जे को स्थायी रूप देने का प्रयास किया जा सकता है।
मामले में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि स्थानीय तहसील के अधिकारियों से जांच कराने के बजाय किसी अन्य तहसील के राजस्व एवं चकबंदी अधिकारियों की टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।


