मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में बेटी की शादी के लिए मेहनत-मजदूरी कर जमा किए 4 लाख 71 हजार रुपये बैंक खाते से निकल जाने के बाद परेशान सुरक्षा गार्ड को साइबर क्राइम पुलिस ने पूरी रकम वापस करा दी। बैंक खाते में महज 30 रुपये बचे होने की जानकारी मिलने पर राजकुमार के होश उड़ गए थे। साइबर क्राइम पुलिस की जांच में सामने आया कि उनका पुराना मोबाइल नंबर दूसरे व्यक्ति को आवंटित हो गया था। उस नंबर से पेमेंट ऐप का इस्तेमाल किए जाने पर भुगतान राजकुमार के बैंक खाते से होते रहे। पुलिस ने तकनीकी जांच और प्रयासों के बाद पूरी रकम वापस कराई।
शनिवार शाम करीब 7 बजे पुलिस द्वारा जानकारी दी गई कि राजकुमार पुत्र मोहन सिंह मूल रूप से फर्रुखाबाद जिले के निवासी हैं और फिलहाल मुज़फ़्फ़रनगर के नई मंडी थाना क्षेत्र के गांव शेरनगर स्थित रोडी प्लांट बाईपास में रहते हैं। वह रोडी प्लांट में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते हैं। राजकुमार ने दिन-रात मेहनत कर अपनी बेटी की शादी के लिए बैंक खाते में 4 लाख 71 हजार रुपये जमा किए थे। जब वह जरूरत के लिए बैंक से रुपये निकालने पहुंचे तो पता चला कि खाते में केवल 30 रुपये शेष हैं। जमा पूंजी निकल जाने से वह परेशान हो गए।
राजकुमार ने SSP सूरज कुमार राय के समक्ष शिकायत दी। मामले की जांच साइबर क्राइम थाना पुलिस को सौंपी गई। पुलिस के मुताबिक, जांच में पता चला कि राजकुमार का पुराना मोबाइल फोन और सिम कार्ड खो गया था। उन्होंने पुराना सिम बंद नहीं कराया और नया मोबाइल फोन व सिम इस्तेमाल करने लगे। कुछ समय बाद दूरसंचार कंपनी ने उनका पुराना मोबाइल नंबर शाहजहांपुर जिले के एक अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया।
पुलिस के अनुसार, नए आवंटित नंबर का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति ने पेमेंट ऐप का उपयोग किया। यह ऐप राजकुमार के बैंक खाते से लिंक हो गया, जिस कारण उस व्यक्ति के भुगतान अनजाने में राजकुमार के खाते से होने लगे। इस तरह धीरे-धीरे खाते से 4 लाख 71 हजार रुपये निकल गए।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तकनीकी जांच और प्रयासों के जरिए राजकुमार के खाते से निकली पूरी रकम वापस कराई। बेटी की शादी के लिए जुटाई गई जमा पूंजी लौटने पर राजकुमार ने मुज़फ़्फ़रनगर पुलिस का आभार जताया।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल फोन या सिम खोने पर तत्काल दूरसंचार कंपनी से संपर्क कर पुराने सिम को बंद कराएं। बैंक खाते, यूपीआई और डिजिटल भुगतान सेवाओं से जुड़े मोबाइल नंबर को भी समय रहते अपडेट करें। किसी भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

