Home » उत्तर प्रदेश » मुजफ्फरनगर पोस्ट » मुजफ्फरनगर में गरीब ‘बच्चों के हक पर डाका’! मेडिकल और श्रीराम कॉलेज समेत 10 शिक्षण संस्थानों पर मुकदमा दर्ज

मुजफ्फरनगर में गरीब ‘बच्चों के हक पर डाका’! मेडिकल और श्रीराम कॉलेज समेत 10 शिक्षण संस्थानों पर मुकदमा दर्ज

Muzaffarnagar Minority Scholarship Scam: ₹46 Lakh Fraud, FIR Against 10 Institutes
Facebook
Twitter
WhatsApp

मुजफ्फरनगर में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में 46.36 लाख रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की प्रारंभिक जांच में 10 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ फार्मेसी और इस्लामिया डिग्री कॉलेज आदि ने फर्जी दस्तावेजों और अपात्र छात्रों के नाम पर सरकारी धन का गबन किया।


 

थाना सिविल लाइन में 17 व्यक्तियों, जिनमें पांच महिलाएं और एक अज्ञात शामिल हैं, के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस घोटाले ने जिले में हड़कंप मचा दिया है।

 

घोटाले का खुलासा और जांच

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 19 अप्रैल 2024 को उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद, उत्तर प्रदेश शासन ने सभी जिलों में जांच का आदेश जारी किया।

मुजफ्फरनगर में 17 संस्थानों की जांच हुई, जिसमें 10 संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। 21 मार्च 2021 को मंत्रालय ने संदिग्ध संस्थानों की सूची भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मैत्री रस्तोगी ने बताया कि 8 मई 2025 को खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम ने जांच पूरी की, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर शासन की स्वीकृति से FIR दर्ज की गई। जांच में निम्नलिखित अनियमितताएं सामने आईं:

अपात्र छात्रों को शामिल करना: कई छात्रों के नाम सूची में जोड़े गए, जो पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।

फर्जी दस्तावेज: आय, जाति, और प्रवेश प्रमाण पत्र जाली पाए गए। 

‘घोस्ट स्टूडेंट्स’: कुछ मामलों में छात्रों का कोई अस्तित्व ही नहीं था। 

कुल 150 फर्जी विद्यार्थियों के नाम पर 46.36 लाख रुपये का गबन किया गया।

Read more…: मुजफ्फरनगर में भाकियू की ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा: देशभक्ति का जज्बा, सड़कों पर जाम

Muzaffarnagar Minority Scholarship Scam: ₹46 Lakh Fraud, FIR Against 10 Institutes
श्रीराम कॉलेज ऑफ गु्रप (फाइल फोटो)

 

शामिल शिक्षण संस्थान और राशि 

जांच में शामिल 10 शिक्षण संस्थानों और उनके द्वारा गबन की गई राशि इस प्रकार है: 

  1. केपीएस गर्ल्स कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अलीपुर कलां: 15 लाख रुपये
  2. इस्लामिया डिग्री कॉलेज: 8 लाख रुपये
  3. श्रीराम कॉलेज ऑफ फार्मेसी: 5 लाख रुपये
  4. मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज, बेगराजपुर: 4.5 लाख रुपये
  5. मदरसा इस्लामिया अरबिया, सिकन्दरपुर: 3.25 लाख रुपये
  6. श्री मंगल सिंह आईटीआई: 3 लाख रुपये
  7. लार्ड महावीर, कृष्णापुरी: 3.5 लाख रुपये
  8. दयानंद गुरूकुल इंटर कॉलेज, बिरालसी: 1.75 लाख रुपये
  9. जनता इंटर कॉलेज, हरसौली: 1.25 लाख रुपये
  10. मूलचंद इंटर कॉलेज, सैनीपुर परासौली: एक लाख रुपये

ये संस्थान आईटीआई, मदरसे, गुरुकुल, इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेजों की श्रेणी में आते हैं

 

Muzaffarnagar Minority Scholarship Scam: ₹46 Lakh Fraud, FIR Against 10 Institutes
मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज (फाइल फोटो)

 

कानूनी कार्रवाई और प्रशासन का रुख 

जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के वरिष्ठ सहायक अजलान शाह की तहरीर पर थाना सिविल लाइन में 17 व्यक्तियों, जिनमें संस्थानों के इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (INO) और हेड ऑफ इंस्टीट्यूट (HOI) शामिल हैं, के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

सिविल लाइन थाना प्रभारी आशुतोष कुमार ने बताया कि ‘उप निरीक्षक सतेन्द्र सिंह ढिल्लो को जांच सौंपी गई है।’

मैत्री रस्तोगी ने स्पष्ट किया कि ‘यह घोटाला उनके कार्यकाल से पहले का है और शासन के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है। शासन ने भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की बात कही है।’

 

Read more…: ‘वोट चोरी’ पर BJP का पलटवार: राहुल, अखिलेश, प्रियंका और डिंपल की सीटों पर लगाया गड़बड़ी का आरोप

 

घोटाले की प्रक्रिया और कमजोरियां 

छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया में INO और HOI द्वारा ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदनों की जांच और सिफारिश की जाती है, जिसके बाद विभाग स्वीकृति देता है। इस मामले में, संस्थानों ने फर्जी दस्तावेजों और गैर-मौजूद छात्रों के नाम पर आवेदन फॉरवर्ड किए।

विशेषज्ञों के अनुसार, निगरानी की कमी, ऑनलाइन सत्यापन की कमजोरी, और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार इस घोटाले के प्रमुख कारण हैं। यह घोटाला वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्री-मैट्रिक (कक्षा 9-10), पोस्ट-मैट्रिक (कक्षा 11-12) और डिग्री पाठ्यक्रमों के लिए हुआ।

 

‘गरीब छात्रों के हक पर डाका’

इस घोटाले ने मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “गरीब छात्रों के हक पर डाका” बता रहे हैं, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती की मांग कर रहे हैं।

यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि जरूरतमंद छात्रों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है। कई संस्थान अब अपने रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर रहे हैं। यह घोटाला उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों, जैसे बस्ती में 1.46 करोड़ और उत्तराखंड में 91 लाख रुपये के घोटालों से जुड़ा प्रतीत होता है, जो इस समस्या की व्यापकता को दर्शाता है।

 

Read more…:यशोदा हॉस्पिटल में रोबोटिक सर्जरी के बाद दो मौतें: लापरवाही या तकनीकी खामी?

 

मुजफ्फरनगर में पहले भी हो चुका है ऐसा घोटाला

साल 2009 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात रिंकू सिंह राही ने छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में लगभग 100 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। इस घोटाले में फर्जी बैंक खातों के जरिए सरकारी धन का गबन किया जा रहा था।

राही की शिकायत पर तत्कालीन सपा नेता मुकेश चौधरी और अन्य के खिलाफ थाना सिविल लाइन में जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद, 26 मार्च 2009 को राही पर उनके सरकारी आवास पर बैडमिंटन खेलते समय दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं, उनकी एक आंख की रोशनी चली गई और जबड़ा क्षतिग्रस्त हो गया।

 

rinkoo singh rahee
रिंकू सिंह राही, आईएएस अधिकारी (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, फाइल फोटो)

 

चार को सजा, मुकेश हुए बरी

फरवरी 2021 में विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने चार आरोपियों पंकज शर्मा, अमित छोकर, अशोक कश्यप और प्रह्लाद को 10-10 साल की सजा और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, लेकिन सपा नेता मुकेश चौधरी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

इस हमले के बाद राही ने संघर्ष जारी रखा और 2022 में यूपीएससी परीक्षा पास की। 2025 में ट्रेनी आईएएस के रूप में वापसी की।

अमित सैनी
Author: अमित सैनी

अमित सैनी एक वरिष्ठ पत्रकार है, जिन्हें नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया में काम करने का करीब 20 साल का अनुभव है। श्री सैनी 'द एक्स इंडिया' के प्रधान संपादक भी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *