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छह साल की बच्ची से दरिंदगी करने वाले को उम्रकैद: पॉक्सो कोर्ट ने दोषी को आख़िरी सांस तक जेल में रखने की सजा सुनाई, पीड़िता के पुनर्वास के लिए 25 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश

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मुज़फ़्फ़रनगर। छह साल की बच्ची के साथ लैंगिक अपराध के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी पप्पू को ऐसी उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसमें उसे अपने शेष प्राकृतिक जीवन तक यानी आख़िरी सांस तक जेल में रहना होगा। शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनोज कुमार सिद्ध की अदालत ने 17 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए दोषी पर कुल 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इसके अलावा पीड़िता के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए 25 हजार रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना 19 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 10:30 बजे की है। छह वर्षीय बच्ची घर से परचून की दुकान पर सामान लेने जा रही थी। इसी दौरान छपार निवासी पप्पू उसे बहलाकर जंगल की ओर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ लैंगिक अपराध किया। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग जुटने लगे तो आरोपी मौके से फरार हो गया। बाद में बच्ची के पिता ने छपार थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने 20 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए और मौखिक व लिखित साक्ष्य पेश किए। विशेष लोक अभियोजक प्रदीप बालियान और दिनेश कुमार शर्मा ने अदालत में अभियोजन की ओर से पैरवी की। गवाहों और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पप्पू को दोषी ठहराया।

अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एम)/6 के तहत दोषी को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत भी पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।

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पीड़िता के चिकित्सा खर्च और पुनर्वास के लिए 25 हजार रुपये प्रतिकर देने के निर्देश भी दिए गए हैं। अदालत ने दोषी की विचारण, अन्वेषण और जांच के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। फैसले में स्पष्ट किया गया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दी गई उम्रकैद दोषी के शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक लागू रहेगी।

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