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मुजफ्फरनगर में प्रदूषण के खिलाफ  कार्रवाई! कई पेपर मिलों में आरडीएफ प्लांट और बॉयलर सील

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मुजफ्फरनगर जिले में आरडीएफ (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) ईंधन के उपयोग से हो रहे प्रदूषण की शिकायतों पर प्रशासन ने तेजी से एक्शन लिया है। DM के निर्देश पर गठित टीम ने 14 फरवरी को कई पेपर मिलों का निरीक्षण किया और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के उल्लंघन पर कई इकाइयों के प्लांट व बॉयलर सील कर दिए।

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मुजफ्फरनगर में आरडीएफ ईंधन के परिवहन और उपयोग से जुड़ी प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर DM ने 22 दिसंबर 2025 को एक विशेष टीम गठित की थी।
इस टीम ने 14 फरवरी 2026 को जौली रोड, भोपा रोड और मेरठ रोड पर स्थित पेपर मिलों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण की अगुवाई नगर मजिस्ट्रेट ने की। 

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टीम में क्षेत्रीय अधिकारी गीतेश चंद्रा, सहायक पर्यावरण अभियंता कुंवर संतोष, अवर अभियंता (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुजफ्फरनगर), संभागीय परिवहन अधिकारी और टैक्स कलेक्टर (नगर पालिका परिषद) शामिल रहे। 

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भोपा रोड और मेरठ रोड की मिलों पर सख्ती

टीम ने भोपा रोड स्थित मैसर्स शाकुम्बरी पेपर मिल और मेरठ रोड स्थित मैसर्स एरिस्टो क्राफ्ट पेपर मिल में आरडीएफ प्रोसेसिंग के लिए लगे ट्रॉमल प्लांट को सील कर दिया। इन मिलों में प्रोसेसिंग यूनिट्स को तत्काल बंद किया गया। 

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इसके अलावा मैसर्स गैलेक्सी पेपर और मैसर्स कृष्णांचल पेपर का भी निरीक्षण हुआ। यहां वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी। इस आधार पर ये मिलें भी कार्रवाई की ज़द में आईं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस कार्रवाई से मिल मालिकों में हड़कंप मचा रहा।

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प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम

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DM के निर्देश पर यह कार्रवाई प्रदूषण को रोकने और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। स्थानीय स्तर पर आरडीएफ के उपयोग से वायु और जल प्रदूषण की शिकायतें लगातार आ रही थीं, जिसके चलते प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। 

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यह कार्रवाई स्थानीय निवासियों और किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के अनुरूप है, जो दिल्ली से आने वाले कचरे से बने ईंधन के इस्तेमाल से हो रहे नुकसान की ओर इशारा करती रही हैं।
प्रशासन ने संकेत दिया है कि आगे भी ऐसी जांचें जारी रहेंगी और उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी।

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