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26 साल पुराने हत्याकांड में पूर्व प्रधान पति समेत 7 दोषी करार: मामले में 2 आरोपी दोषमुक्त, रास्ते में युवकों को पीटने के बाद छुड़ाने पहुंचे लोगों पर हुई थी फायरिंग

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में चुनावी रंजिश से जुड़े करीब 26 साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधान पति बसंत समेत सात आरोपितों को दोषी ठहराया है। वहीं दो आरोपितों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो चुकी थी, जिसके बाद उसकी फाइल बंद कर दी गई थी। दोषियों की सजा के बिंदु पर 26 सितंबर को सुनवाई होगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मामला भोपा थाना क्षेत्र के धीराहेड़ी गांव का है। पंचायत चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश में 20 सितंबर 2000 को जयविंद्र अपने गांव के रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। तीनों जब गांव में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे तो आरोपित पक्ष ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया।

आरोप है कि दोनों युवकों के साथ मारपीट की गई और उन्हें खींचकर धूम सिंह के मकान में ले जाया गया। जयविंद्र ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी। इसके बाद धर्मवीर, सत्यपाल, संजीव, सुरेंद्र, लोटन सिंह, विनोद, रविंद्र और धर्मपाल समेत अन्य लोग दोनों युवकों को छुड़ाने के लिए मौके पर पहुंचे।

अभियोजन के अनुसार, इसी दौरान आरोपितों ने बंदूक, पिस्टल और तमंचों से फायरिंग कर दी। गोलीबारी में सुरेंद्र, रविंद्र समेत कई लोग घायल हुए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से रविंद्र और सत्यपाल को गंभीर हालत में मेरठ रेफर किया गया। मेरठ ले जाते समय रविंद्र की मौत हो गई।

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मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद 10 आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-1 की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिवाच की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने घटना को साबित करने के लिए 12 गवाह पेश किए।

अदालत ने पूर्व प्रधान के पति बसंत के अलावा अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज और प्रीतम को दोषी ठहराया। वहीं गन्ना सोसायटी के पूर्व चेयरमैन धूम सिंह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद उसकी फाइल बंद कर दी गई। उसके पुत्र गुलवीर और ओमवीर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।

अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी राजीव शर्मा, एडीजीसी अरुण कुमार और अधिवक्ता अनोद बालियान ने पैरवी की। अब दोषी ठहराए गए सातों आरोपितों को क्या सजा मिलेगी, इस पर अदालत 26 सितंबर को सुनवाई करेगी।

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