मुज़फ़्फ़रनगर। शामली की एक विधवा महिला ने अपने दामाद पर धोखाधड़ी और कथित कूटरचित दस्तावेजों के जरिए करीब 10 बीघा कृषि भूमि और ट्यूबवैल अपने नाम कराने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि वह अनपढ़ है और बुढ़ाना तहसील में मुंशी का काम करने वाले अपने दामाद पर भरोसा करती थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसके साथ जमीन के दस्तावेजों में धोखाधड़ी की गई। पीड़िता ने मुज़फ़्फ़रनगर के एसएसपी को शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कर जांच और जमीन वापस दिलाने की मांग की है। शिकायत के संबंध में मीडिया से बात करते हुए महिला भावुक होकर रो पड़ी।
शामली जिले के आदर्श मंडी थाना क्षेत्र के मुंडेट कलां गांव निवासी विधवा बाला पत्नी स्वर्गीय भोपाल के मुताबिक, उसने 16 मई 2024 को बुढ़ाना थाना क्षेत्र के गांव मंदवाड़ा में यामीन पुत्र वकील से करीब 10 बीघा कृषि भूमि खरीदी थी। महिला का कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री और बैनामे की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण उसने पूरी प्रक्रिया अपने दामाद के भरोसे छोड़ दी थी। उसका दामाद बुढ़ाना तहसील में मुंशी का काम करता है।
पीड़िता का आरोप है कि बैनामे की कार्रवाई के नाम पर दामाद ने दस्तावेज तैयार कराए और उससे विभिन्न कागजात पर अंगूठे लगवा लिए। महिला का दावा है कि इसी दौरान उसकी जानकारी के बिना उसी तारीख को कृषि भूमि का हिबानामा यानी दान-पत्र भी दामाद के नाम तैयार करा लिया गया और उस पर भी उसके अंगूठे लगवा लिए गए। शिकायत में कहा गया है कि इसके बाद राजस्व अभिलेखों में भी जमीन दामाद के नाम दर्ज हो गई।
महिला का आरोप है कि जब उसे मामले की जानकारी हुई और उसने अपनी जमीन वापस मांगी तो उसे धमकाया जाने लगा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कानूनी कार्रवाई करने पर उसे और उसके दोनों बेटों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
पीड़िता ने एसएसपी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी राहुल कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और धमकी देने सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उसने अपनी जमीन और ट्यूबवैल वापस दिलाने की गुहार लगाई है।
पीड़िता के भांजे शिवम ने भी मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि उसकी मौसी की करीब 10 बीघा जमीन दामाद ने धोखाधड़ी से अपने नाम करा ली है। शिवम के मुताबिक, जमीन वापस मांगने पर धमकी दी जा रही है, जिसके चलते परिवार एसएसपी कार्यालय पहुंचा है।
पुलिस की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन के दस्तावेज किस प्रक्रिया से दामाद के नाम दर्ज हुए और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
