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मुजफ्फरनगर में दर्दनाक हादसा: नीलगाय से टकराई स्कूटी, एक-एक कर बुझ गए परिवार के तीन चिराग

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मुजफ्फरनगर। थाना सिविल लाइन क्षेत्र के मोहल्ला मल्लूपुरा में किराए के मकान में रह रहे एक गरीब परिवार पर सड़क हादसे ने ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही दिनों के भीतर परिवार के तीन सदस्य हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए। बीमार पिता को दवाई दिलाने के लिए स्कूटी से निकले दो बेटों और उनके पिता की एक-एक कर मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। वहीं, परिवार के कमाने वाले सदस्यों के चले जाने से घर के सामने अब आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

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दधेडू के पास अचानक सड़क पर आ गई नीलगाय

जानकारी के अनुसार, 29 अगस्त की सुबह मल्लूपुरा निवासी करीब 80 वर्षीय अशफाक अपने दोनों बेटों करीब 38 वर्षीय मोहम्मद नाहिद और करीब 35 वर्षीय मोहम्मद साजिद के साथ स्कूटी से चरथावल दवाई लेने जा रहे थे। बताया गया कि तीनों दधेडू पार कर रजवाहे की पुलिया के पास पहुंचे थे।

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इसी दौरान जंगल की ओर से अचानक एक नीलगाय सड़क पर आ गई। स्कूटी सवार तीनों लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही स्कूटी की नीलगाय से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

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पुलिस ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल

हादसे की सूचना मिलते ही चरथावल पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने तीनों घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद मोहम्मद साजिद की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।

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परिजन साजिद को बेहतर इलाज के लिए मेरठ के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन 30 अगस्त को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार अभी एक बेटे की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि दूसरी दुखद खबर ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया।

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एक सितंबर को दूसरे बेटे ने भी तोड़ा दम

हादसे में घायल मोहम्मद नाहिद का मुजफ्फरनगर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। परिवार के लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन एक सितंबर को उपचार के दौरान नाहिद ने भी दम तोड़ दिया।

नाहिद की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सबसे छोटी बेटी की उम्र महज डेढ़ वर्ष है। पिता की मौत के बाद इन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है।

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पांच दिन तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे बुजुर्ग अशफाक

हादसे में गंभीर रूप से घायल परिवार के बुजुर्ग अशफाक का भी उपचार चल रहा था। उन्हें रुड़की रोड स्थित डिवाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब पांच दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चला और परिवार के लोग उनके ठीक होने की उम्मीद कर रहे थे।

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लेकिन 2 सितंबर की रात अशफाक ने भी दम तोड़ दिया। बेटे साजिद और नाहिद की मौत के बाद बुजुर्ग पिता की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। महज कुछ दिनों के अंतराल में पिता और उनके दोनों बेटों की मौत से परिवार में मातम छा गया।

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एक हादसा और उजड़ गया पूरा परिवार

इस दर्दनाक हादसे ने एक परिवार से एक साथ तीन जिंदगियां छीन लीं। बीमार पिता को दवाई दिलाने के लिए निकले दोनों बेटे खुद मौत का शिकार हो गए और अंत में घायल पिता ने भी जिंदगी की जंग हार दी।

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परिजनों के लिए यह त्रासदी इसलिए भी अधिक भयावह है क्योंकि परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर था और किराए के मकान में रहकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहा था। अब परिवार के कमाने वाले सदस्यों के चले जाने के बाद घर-परिवार चलाने की जिम्मेदारी और बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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साजिद की मौत की खबर पर सांसद ने पहुंचकर बंधाया ढांढस

मोहम्मद साजिद की मौत की जानकारी मिलने के बाद मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद हरेंद्र मलिक भी पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और इस मुश्किल घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

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सांसद ने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के स्तर से पीड़ित परिवार को जो भी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है, उसे दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा।

सभासद ने जिलाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से मांगी मदद

नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के वार्ड नंबर सात के सभासद मोहम्मद खालिद ने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि परिवार किराए के मकान में रहता है और हादसे ने उसकी पूरी स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

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सभासद ने जिलाधिकारी, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। उनका कहना है कि परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद अब बच्चों और अन्य परिजनों के सामने जीवनयापन का बड़ा संकट पैदा हो गया है।

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डेढ़ साल की बच्ची समेत तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

मोहम्मद नाहिद की मौत ने उनके तीन छोटे बच्चों का भविष्य भी मुश्किल में डाल दिया है। इनमें सबसे छोटी बच्ची की उम्र महज डेढ़ वर्ष बताई जा रही है। इतनी कम उम्र में बच्चों ने अपने पिता को खो दिया।

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परिवार पहले ही सीमित संसाधनों में किराए के मकान में जीवन गुजार रहा था। अब परिवार के कमाने वाले सदस्यों के नहीं रहने से बच्चों की परवरिश, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन गया है।

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प्रशासनिक मदद के साथ समाज से भी सहयोग की उम्मीद

हादसे के बाद पीड़ित परिवार को अब तत्काल आर्थिक और सामाजिक सहयोग की जरूरत है। परिजनों और स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन परिवार की स्थिति का आकलन कर नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराए।

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जनप्रतिनिधियों से भी परिवार के बच्चों के भविष्य और जीवनयापन को ध्यान में रखते हुए हरसंभव मदद की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों का कहना है कि ऐसी विपदा में समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर परिवार का सहारा बनना चाहिए, ताकि अपनों को खो चुके इस परिवार को कम से कम बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष न करना पड़े।

नीलगाय के अचानक सड़क पर आने से हुआ यह हादसा सिर्फ तीन जिंदगियां नहीं ले गया, बल्कि पीछे मासूम बच्चों और बेसहारा परिजनों को छोड़ गया। अब इस परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनों की कमी के साथ जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना है।

 

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