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मुजफ़्फ़रनगर में परशुराम जयंती की बैठक बनी ‘पॉलिटिकल अखाड़ा’, मंच पर ही भिड़े नेता, कार्यक्रम बेमतलब खत्म!

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तैयारी कम, तकरार ज्यादा! निजी रंजिश ने बिगड़ा बैठक का माहौल, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे में डूबा आयोजन

मुजफ्फरनगर। भगवान परशुराम जयंती को भव्य बनाने के लिए बुलाई गई “त्यागी–ब्राह्मण” समाज की बैठक देखते ही देखते राजनीतिक टकराव का मंच बन गई। साकेत कॉलोनी के एक स्कूल में सोमवार शाम आयोजित इस बैठक में ब्राह्मण और त्यागी समाज के लोग जुटे जरूर, लेकिन चर्चा आयोजन की कम और आरोप-प्रत्यारोप की ज्यादा होती रही।

निजी विवाद ने बदला पूरा माहौल

बैठक के दौरान कथित बीजेपी नेता अखिलेश शर्मा ने अपने साथ हुई हालिया मारपीट का मुद्दा उठाते हुए नाराजगी जताई और समाज पर सहयोग न करने का आरोप लगाया। इसी के साथ माहौल गरमा गया और धार्मिक आयोजन की बैठक अचानक व्यक्तिगत विवाद का केंद्र बन गई।

मंच से ही पलटवार, माइक छोड़कर उतरे नेता

सपा के वरिष्ठ नेता राकेश शर्मा ने मंच से ही जवाब देते हुए खुद के समर्थन की बात गिनाई और अखिलेश शर्मा को कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि तुम बकवास क्यों कर रहे हो? बहस इतनी तीखी हो गई कि राकेश शर्मा ने गुस्से में माइक छोड़ दिया और आगे बोलने से इनकार कर दिया।

बीच-बचाव नाकाम, बढ़ता गया हंगामा

स्थिति संभालने के लिए मांगेराम त्यागी ने मंच से अपील की, लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था। एक के बाद एक नेता अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे और बैठक का मूल एजेंडा पूरी तरह गायब हो गया।

खुला विरोध, माहौल और बिगड़ा

इसी बीच बीजेपी नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र शर्मा ने भी अखिलेश शर्मा के रवैये पर सख्त आपत्ति जताई और खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया। आवेश में आए हरेंद्र शर्मा ने इस दौरान अखिलेश शर्मा को पीछे से एक थप्पड़ जड़ते हुए धक्का तक दे दिया, इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया और हंगामा चरम पर पहुंच गया।

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मामले का वीडियो देखें–

बेनतीजा खत्म हुई बैठक

आखिरकार अखिलेश शर्मा को बैठक से बाहर किया गया, जिसके बाद अन्य लोग भी एक-एक कर बाहर निकल गए। जिस बैठक का उद्देश्य भगवान परशुराम जयंती को भव्य बनाना था, वह बिना किसी निष्कर्ष के खत्म हो गई।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

बीजेपी नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र शर्मा ने अखिलेश शर्मा को थप्पड़ मारने के मामले पर कहा कि “थप्पड़ नहीं मारा है, बल्कि उसे बेफालतू का विवाद खड़ा करने से रोकना चाहा था।” उन्होंने ये भी कहा कि “वो एक सामाजिक बैठक थी, जिसमें ब्राह्मण–त्यागी समाज के सभी दलों एवं सभी फील्ड से प्रतिष्ठित एवं गणमान्य लोग उपस्थित हुए थे, लेकिन अखिलेश शर्मा ने अपना निजी मुद्दा वहां पर उठाया।”

मुद्दा पीछे, राजनीति आगे

पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यही दिखाया कि स्थानीय बैठकों में मुद्दों से ज्यादा अहमियत अब व्यक्तिगत विवाद और राजनीतिक टकराव को मिल रही है, जहां आयोजन की योजना पीछे छूट जाती है और हंगामा ही मुख्य परिणाम बनकर सामने आता है।

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