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‘हे जगदंबिके! कौन-सा शब्द आपकी स्तुति नहीं’, नवरात्र के छठे दिन PM मोदी ने साझा किया मां दुर्गा का दिव्य सुभाषित

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नई दिल्ली। नवरात्र के छठे दिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुभाषित साझा कर देवी को नमन किया गया। उन्होंने संस्कृत श्लोक साझा कर मां कात्यायनी को प्रणाम किया। प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक, “तव च का किल न स्तुतिरम्बिके! सकलशब्दमयी किल ते तनुः। निखिलमूर्तिषु मे भवदन्वयो मनसिजासु बहिःप्रसरासु च॥” साझा किया गया, जिसका भावार्थ है कि हे जगदम्बिके! संसार में भला ऐसा कौन-सा शब्द है, जो आपकी स्तुति नहीं है? क्योंकि आपका स्वरूप तो समस्त शब्दों से बना है।

हे देवी! मेरे मन में उठने वाले सभी विचारों और बाहर दिखाई देने वाली समस्त आकृतियों एवं मूर्तियों में मुझे आपका ही स्वरूप दिखाई देता है। पीएम की ओर से साझा किया यह संस्कृत श्लोक, मां दुर्गा की प्रसिद्ध स्तुति ‘देवीमयी’ का अंश है। इस श्लोक के माध्यम से देवी की स्तुति की गई है। इस श्लोक में साधक की उच्च अवस्था का वर्णन किया गया है, यानी कि साधक को संपूर्ण सृष्टि, वाणी, और मन के संकल्प-विकल्पों में केवल देवी के ही दर्शन होते हैं।

इस श्लोक के माध्यम से साधक देवी से कहता है कि हे जगदंबिके! इस संसार में ऐसा कौन सा शब्द या वाणी है जिसे तेरी स्तुति न कहा जाए, क्योंकि तेरा विग्रह (शरीर) तो संपूर्ण शब्दों और अक्षरों से रचित है। हे देवी! अब स्थिति यह हो गई है कि मेरे मन के भीतर उठने वाले विचारों से लेकर बाहर प्रकट होने वाली समस्त संसार की मूर्तियों और रूपों में मुझे केवल तुम्हारा ही रूप समाया हुआ दिखाई देता है।

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बता दें कि नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जा रही है। मां कात्यायनी देवी दुर्गा का छठा रूप हैं। मां की चार भुजाएं हैं। उनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल पुष्प है। उनके अन्य दोनों हाथ वरदा मुद्रा (वरदान देने वाली) और अभय मुद्रा (भय दूर करने वाली) में हैं। उनका वाहन सिंह (शेर) है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। मां की उपासना मुख्य रूप से शीघ्र विवाह, वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए की जाती है।

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