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सीजेपी नेताओं की जेल पर राहुल गांधी का हमला: बोले- तिरंगा लहराने पर युवाओं को जेल भेजना कायरता, जंतर-मंतर जनता का है

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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध नहीं है और इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है।

राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया ब्लॉक सहित अलग-अलग मंचों से जुड़े लोग अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।”

दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत

सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। तीनों को मंगलवार सुबह पुलिस बैरिकेड्स पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश के बाद हिरासत में लिया गया था।

पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित किए जाने के बाद वहां प्रवेश करने और प्रदर्शन करने को लेकर कार्रवाई की गई। तीनों नेताओं पर अतिक्रमण, बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और लोक सेवकों के कर्तव्य में बाधा डालने से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।

एसआईआर में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन

सीजेपी के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए और पुलिस बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

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पुलिस के मुताबिक, तीनों नेताओं को पहले भी 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उस मामले में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका को 50 हजार रुपये का बॉन्ड भरने के बाद इस शर्त पर रिहा किया गया था कि वे एक साल तक शांति भंग करने से जुड़ी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।

इस बार पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका पर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और अतिक्रमण के आरोप लगाए हैं। पुलिस उन्हें आदतन अपराधी के तौर पर देख रही है। हालांकि, इन आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय होगा।

जंतर-मंतर को लेकर दिल्ली पुलिस का फैसला

दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध स्थल के रूप में गैर-अधिसूचित कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए अब तीन अन्य स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।

विरोध के अधिकार को लेकर फिर चर्चा

सीजेपी नेताओं की हिरासत और न्यायिक कार्रवाई के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने नेताओं को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए इसे युवाओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है। वहीं, पुलिस की कार्रवाई निर्धारित विरोध स्थल से जुड़े नियमों और कथित उल्लंघनों के आधार पर की गई है।

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फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रांका पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है।

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