मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के GIC मैदान में रातभर चली भाकियू की मजदूर-किसान महापंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सहारनपुर मस्जिद प्रकरण से लेकर रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी तक के मुद्दे उठाए। टिकैत ने कहा कि अब देश आंदोलन से बचेगा और शांतिपूर्ण आंदोलन ही किसान की ताकत है। उन्होंने 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन पर पंचायत करने का ऐलान भी किया।
सहारनपुर के मस्जिद प्रकरण पर राकेश टिकैत ने कहा कि कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर मस्जिद गिराई गई। उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मस्जिद का मुद्दा भाजपा सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अगर रामपुर की यूनिवर्सिटी को तोड़ने की कार्रवाई की गई तो ट्रैक्टर और जेसीबी के बीच टकराव की स्थिति पैदा होगी। टिकैत ने मेरठ के अस्पतालों और बाजारों में हुई कार्रवाई का भी जिक्र करते हुए सरकार से अपनी नीति बदलने की मांग की।
राकेश टिकैत ने किसानों से खर्च कम करने और जमीन बचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सस्ते दूध का लालच देकर पशुधन खत्म करने की साजिश हो रही है और आने वाले समय में जमीन किसानों के हाथ से निकल सकती है। उनका कहना था कि खेती घाटे का सौदा नहीं है, लेकिन किसानों को खेती के तरीके और खर्च की व्यवस्था बदलनी होगी। उन्होंने गन्ने का भाव 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास करने की मांग रखी।
महापंचायत में गन्ने के भाव का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि गन्ना किसान घाटे में है और सरकार को नए पेराई सत्र से पहले गन्ने का मूल्य घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण के नाम पर ली जा रही है और सरकार को अन्नदाता के हितों का ध्यान रखना चाहिए। नरेश टिकैत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों को गन्ने के भाव के रूप में राहत देने की मांग की।
भाकियू ने किसानों के लिए MSP की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद कानून की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 16 और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 15 सूत्रीय मांगपत्र भेजे गए। इनमें लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने, किसानों और कृषि मजदूरों की कर्जमाफी, ब्याजमुक्त कृषि ऋण तथा कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली की मांग शामिल है।
इसके अलावा सभी घरेलू और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने, डीएपी-यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता, फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं में पर्याप्त मुआवजे की मांग रखी गई। भूमि अधिग्रहण और बेदखली के मामलों में पुनर्वास तथा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के पालन की भी मांग की गई।
भाकियू ने किसानों और मजदूरों से जुड़े श्रम कानूनों, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति को वापस लेने की मांग भी उठाई। संगठन ने ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों का विरोध किया जिनसे उसके अनुसार भारतीय कृषि, डेयरी, MSP और ग्रामीण रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
महापंचायत में उत्तराखंड के खानपुर विधायक उमेश शर्मा भी पहुंचे। उन्होंने भी किसान संगठनों को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करती रही हैं। चीनी के बढ़ते दामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गन्ने का भाव भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए।
भाकियू की ओर से पहली बार रात के समय आयोजित की गई इस महापंचायत में दूर-दराज से आए कई हजार किसान और मजदूर शामिल हुए। मंच से रागिनी और पंजाबी गायकों की प्रस्तुतियां भी हुईं। राकेश टिकैत ने कहा कि किसान मुद्दों को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पंचायतें की जाएंगी और वैचारिक अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।
महापंचायत के चलते शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। किसानों के वाहन बढ़ने के बाद महावीर चौक, जानसठ पुल और आर्य समाज रोड पर जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने पहले से बड़े वाहनों के रूट डायवर्ट किए थे।

