सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद शनिवार को प्रशासन की ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजरों की मदद से मस्जिद को गिरा दिया। प्रशासन के मुताबिक कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें मस्जिद पक्ष की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया था।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कार्रवाई का विरोध करने और सहारनपुर जाने की तैयारी कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर ही रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारियों से मिलने से भी रोका जा सकता है।
सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन को रोका
मस्जिद के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद इकरा हसन सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर रोक दिया। इस दौरान सांसद और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बातचीत भी हुई।
सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मी इकरा हसन से यात्रा नहीं करने की अपील करते दिखाई दे रहे हैं। इस पर सांसद ने सवाल किया कि उन्हें किस वजह से रोका जा रहा है।
इकरा हसन ने कहा कि उनका सवाल सरकार और प्रशासन से है। उन्होंने कहा कि क्या एक निर्वाचित सांसद को अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े किसी विषय पर अधिकारियों से मिलने के लिए जाना भी अपराध हो गया है। उनके मुताबिक लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
मां तबस्सुम हसन ने भी जताई नाराजगी
इकरा हसन की मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन भी उनके आवास पर मौजूद रहीं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई। तबस्सुम हसन ने कहा कि उनका परिवार किसी दबाव से डरने वाला नहीं है और वह लोगों की सेवा के लिए राजनीति में हैं।
इकरा हसन ने भी स्पष्ट किया कि वह किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से बातचीत करने के लिए सहारनपुर जाना चाहती थीं। उन्होंने सांसद को इस तरह रोके जाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया।
कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा का घेरा
मस्जिद के ध्वस्तीकरण को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। पुलिस के साथ पीएसी और आरआरएफ के जवानों को भी तैनात किया गया। प्रशासन ने मस्जिद के आसपास किसी भी व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं दी।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान इलाके में सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी रही। प्रशासन की ओर से कहा गया कि किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति को रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
सपा एमएलसी ने उठाए कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल
समाजवादी पार्टी के एमएलसी शाहनवाज खान ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले महीने 17 तारीख को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से मस्जिद को अवैध बताते हुए फैसला दिया गया था। उनके मुताबिक मस्जिद से जुड़े जिम्मेदार लोग अदालत गए थे और उन्हें राहत भी मिली थी।
शाहनवाज खान ने कहा कि हायर कोर्ट में फैसले को चुनौती देने के लिए 30 दिनों की राहत दिए जाने की बात थी, लेकिन इसी दौरान अचानक मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
उन्होंने बताया कि जब वह कलेक्ट्रेट पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे। उस समय अलग-अलग तरह की अफवाहें भी फैल रही थीं। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी से बात की और उन्हें आवास पर बुलाया गया। वहां प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी शंकाएं रखीं।
शाहनवाज खान ने शहर में शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि शहर की मोहब्बत को बचाना सबसे जरूरी है। उनके मुताबिक जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि जो भी कार्रवाई होगी, वह कानून के दायरे में होगी।
पूर्व सांसद फजलुर्रहमान ने भी उठाई आपत्ति
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मस्जिद पक्ष जिला अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया।
इस बयान के बाद मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। विपक्षी नेताओं की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया और समय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
डीआईजी बोले, अपील खारिज होने के बाद हुई कार्रवाई
सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया। उनके मुताबिक जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
डीआईजी ने कहा कि कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और अपील समेत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद ही ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया।
इस तरह प्रशासन जहां कार्रवाई को न्यायिक आदेश के अनुपालन के रूप में पेश कर रहा है, वहीं सपा नेताओं की ओर से इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि मस्जिद पक्ष को आगे की कानूनी चुनौती का अवसर मिलने से पहले कार्रवाई क्यों की गई।
शुक्रवार रात अफवाह के बाद जुटी भीड़
ध्वस्तीकरण से पहले शुक्रवार रात सहारनपुर में यह अफवाह फैल गई थी कि प्रशासन कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को गिराने पहुंचने वाला है। सूचना फैलने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
स्थिति की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को वहां से हटाया। इसके बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई।
शनिवार को जब वास्तविक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई तो कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
शिकायत से शुरू हुआ था मस्जिद विवाद
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत में मस्जिद को सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायत में मस्जिद परिसर में बने कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। प्रशासन का दावा है कि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर पाया गया।
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया था आदेश
मामले में प्रशासन की ओर से कार्रवाई के लिए 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दाखिल की गई। इसके बाद नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया।
आदेश में कब्जेदारों से 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके साथ ही संबंधित पक्ष को 30 दिन का समय दिया गया था।
मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को जिला अदालत का रुख किया।
2 सितंबर को जिला अदालत ने अपील की खारिज
मामले की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
अब इस कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गरमा गया है। प्रशासन इसे अदालत के आदेश के अनुपालन के तौर पर बता रहा है, जबकि विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई की प्रक्रिया, समय और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
बुलडोजर कार्रवाई के बाद बढ़ी सियासी हलचल
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। एक तरफ प्रशासन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है, वहीं सपा नेताओं ने सरकार और प्रशासन से कई सवाल पूछे हैं।
इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोके जाने, सपा नेताओं की प्रतिक्रिया और प्रशासन की ओर से सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच यह मामला अब सिर्फ स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में मस्जिद पक्ष की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती हैं।



