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सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर इमरान मसूद का हमला, बोले ‘मस्जिद नहीं, संविधान गिराया गया’; काली पट्टी बांधकर विरोध की अपील

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सहारनपुर। जिला प्रशासन कार्यालय परिसर में स्थित मस्जिद को गिराए जाने के बाद सहारनपुर की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे कानून और संविधान से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद को गिराने की कार्रवाई में कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं की अनदेखी की गई।

इमरान मसूद ने दावा किया कि जिस जमीन को प्रशासन सरकारी कलेक्ट्रेट की जमीन बता रहा है, वह राजस्व रिकॉर्ड में अभी भी वहीद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है। उन्होंने कहा कि इसी जमींदारी के दौरान मस्जिद का निर्माण हुआ था और यह धार्मिक स्थल लंबे समय से अस्तित्व में था।

राजस्व रिकॉर्ड को लेकर प्रशासन से पूछा सवाल

कांग्रेस सांसद ने कहा कि यदि सरकार का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी तो प्रशासन को राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर अपने दावे को साबित करना चाहिए। उनके मुताबिक संबंधित जमीन के रिकॉर्ड सरकार के पास मौजूद हैं और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

मसूद ने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के नाम को लेकर स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि इस पहलू को नजरअंदाज करते हुए मस्जिद को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाने पर उठाया सवाल

इमरान मसूद ने दावा किया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मस्जिद के वक्फ से जुड़े होने का दावा था तो संबंधित कानूनी कार्रवाई में वक्फ बोर्ड को पक्षकार क्यों नहीं बनाया गया।

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उन्होंने ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान का भी उल्लेख किया। मसूद के मुताबिक यदि कोई इमारत लंबे समय से मस्जिद के रूप में इस्तेमाल होती रही है और वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है तो उसके धार्मिक स्वरूप से जुड़े तथ्यों को भी कानूनी प्रक्रिया में महत्व दिया जाना चाहिए।

‘करीब 70 साल से मौजूद थी मस्जिद’

कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद करीब 70 वर्षों से मौजूद थी और वहां लगातार नमाज अदा की जाती रही। उन्होंने कहा कि लंबे समय से धार्मिक गतिविधियां संचालित होने के दावे की भी कानूनी जांच होनी चाहिए थी।

मसूद ने कहा कि किसी धार्मिक स्थल के स्वरूप और उसके उपयोग से जुड़े तथ्यों को नजरअंदाज करके सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड को सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट करने की मांग की।

रात में कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप

इमरान मसूद ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रात में मस्जिद को बंद कराया गया और वहां रखा सामान हटाया गया। इसके बाद रातभर में ढांचे को गिरा दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था और आसपास रहने वाले लोगों को अपने घरों से निकलने की अनुमति नहीं दी गई। मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण के बाद मलबा भी तत्काल हटा दिया गया।

‘मस्जिद नहीं, संविधान गिरा रहे हैं’

कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए इमरान मसूद ने कहा, “वे मस्जिद नहीं गिरा रहे हैं, वे देश के संविधान को गिरा रहे हैं।”

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उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। मसूद ने यह भी दावा किया कि हाईकोर्ट के समक्ष वक्फ बोर्ड को उचित तरीके से पक्षकार नहीं बनाया गया और मामले के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

जेपीसी सदस्य रहने का भी दिया हवाला

इमरान मसूद ने कहा कि वह संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के सदस्य रह चुके हैं और वक्फ से जुड़े प्रावधानों की जानकारी रखते हैं। उन्होंने ‘वक्फ बाय यूजर’ से संबंधित प्रावधानों में हुए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि किसी बदलाव को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता।

उनका कहना है कि पुराने मामलों पर नए प्रावधानों को पीछे की तारीख से लागू करने का सवाल भी कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण है और इसकी जांच आवश्यक है।

कांग्रेस कानूनी लड़ाई लड़ेगी

कांग्रेस सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले को कानूनी दायरे में रहकर उठाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी आगे कदम उठाया जा सकता है।

मसूद ने कहा कि मामले में संविधान और कानून के तहत जो भी रास्ते उपलब्ध हैं, उनका इस्तेमाल किया जाएगा और पूरे घटनाक्रम को मजबूती से उठाया जाएगा।

सहारनपुर के लोगों से काली पट्टी बांधने की अपील

इमरान मसूद ने सहारनपुर के लोगों से प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने की अपील की। उन्होंने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई वाले दिन को सहारनपुर के लिए “काला दिन” बताया।

मसूद की अपील के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। वहीं प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश के आधार पर की गई है।

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प्रशासन के दावे से अलग है कांग्रेस का रुख

मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर प्रशासन और कांग्रेस की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि संबंधित निर्माण को अवैध घोषित करने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई, जबकि इमरान मसूद जमीन के राजस्व रिकॉर्ड, वक्फ बोर्ड की भूमिका, धार्मिक उपयोग और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

अब इस पूरे मामले में कानूनी स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और राजनीतिक विरोध किस दिशा में जाता है, इस पर नजर बनी हुई है। सहारनपुर में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।

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