नई दिल्ली। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘एंटी-पेपर लीक’ बिल पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह विधेयक काफी हद तक पुराने कानून जैसा ही है। उन्होंने दावा किया कि नए बिल में केवल सजा और जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है, जबकि इसकी मूल संरचना पहले जैसी ही है।
आईएएनएस से बातचीत में संजय राउत ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि इस विधेयक से पेपर लीक की घटनाएं रुकेंगी तो यह स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन यह भी देखना होगा कि इसमें वास्तविक बदलाव क्या किए गए हैं।
“सजा और जुर्माना बढ़ा, लेकिन कानून लगभग वही”
संजय राउत ने कहा कि पुराने प्रावधानों की तुलना में नए बिल में जेल की सजा एक वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष तक कर दी गई है, जबकि जुर्माने की राशि एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दस करोड़ रुपये कर दी गई है। उनके अनुसार, इन बदलावों के अलावा कानून की मूल भावना पहले जैसी ही दिखाई देती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देशभर में संचालित होने वाले कथित पेपर लीक रैकेट से जुड़े लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र के नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग भाजपा से जुड़े हुए थे। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
प्रदर्शनकारियों की मदद करने वालों की जांच पर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन, पानी और अन्य सहायता उपलब्ध कराने वाले लोगों की कथित जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन में समाज के लोग स्वेच्छा से आगे आकर प्रदर्शनकारियों की मदद करते हैं और इस तरह की गतिविधियों की जांच उचित नहीं है।
उनके अनुसार, सरकार यह पता लगाने में लगी है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को खाना, पानी और जूस किसने उपलब्ध कराया, जबकि ऐसे सहयोग को सामान्य सामाजिक समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी साधा निशाना
संजय राउत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठे थे और ऐसे में उनका सार्वजनिक स्वागत किया जाना उचित नहीं है।
राउत ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक जवाबदेही दिखानी चाहिए और केवल सख्त कानून बनाने के बजाय पेपर लीक जैसी घटनाओं की जड़ों तक पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।


