देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून बुधवार को टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा के रंग में रंगी नजर आई। श्रद्धालुओं के सैलाब, आकर्षक धार्मिक झांकियों, ढोल नगाड़ों और भगवान शिव के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए भंडारे लगाए गए, जहां लोगों को भोजन, प्रसाद और पेयजल वितरित किया गया।
सुबह से ही शहर के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में शिवभक्त शोभायात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचने लगे। जैसे जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। सड़क के दोनों ओर मौजूद लोगों ने धार्मिक झांकियों के दर्शन किए और कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा देहरादून
शोभायात्रा के दौरान ढोल नगाड़ों और भक्ति संगीत की गूंज के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। शोभायात्रा में युवाओं के साथ महिलाओं और बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
शहर में जगह जगह श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सामाजिक संगठनों, स्थानीय लोगों और विभिन्न संस्थाओं की ओर से भंडारे लगाए गए। इन भंडारों में लोगों को भोजन, प्रसाद और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या में लोग सेवा कार्य में जुटे दिखाई दिए।
सेवा में जुटे लोगों ने कहा कि भगवान शिव की शोभायात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। स्वागत स्थलों और भंडारों पर भी श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
मुख्यमंत्री धामी ने पूजा अर्चना कर किया शोभायात्रा का शुभारंभ
टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। उन्होंने टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज, महंत दिगम्बर भरत गिरी महाराज और टपकेश्वर सेवा दल के अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता के साथ विधि विधान से पूजा अर्चना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शोभायात्रा का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने भगवान टपकेश्वर महादेव से प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए भगवान शिव की आराधना को उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
धार्मिक परंपराएं नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ती हैं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आयोजन से जुड़े संत महात्माओं, आयोजन समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कामना की कि भगवान टपकेश्वर महादेव की कृपा समस्त प्रदेशवासियों पर बनी रहे और उत्तराखंड निरंतर प्रगति एवं समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
शिव पार्वती की झांकियों ने खींचा श्रद्धालुओं का ध्यान
शोभायात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों पर आधारित भव्य झांकियां रहीं। भगवान शिव और माता पार्वती के विभिन्न स्वरूपों के साथ ही कई धार्मिक प्रसंगों को झांकियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
झांकियों की आकर्षक सजावट और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कहीं शिव पार्वती के स्वरूपों ने लोगों का ध्यान खींचा तो कहीं भगवान शिव के विभिन्न रूपों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।
शोभायात्रा के मार्ग पर मौजूद लोगों ने झांकियों के दर्शन किए। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।
देर शाम तक चलेगी भव्य शोभायात्रा
टपकेश्वर महादेव की शोभायात्रा का सिलसिला देर शाम तक जारी रहने की बात कही गई है। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने के कारण पूरे मार्ग पर विशेष उत्साह का माहौल बना रहा।
शोभायात्रा को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी विभिन्न स्थानों पर व्यवस्था संभालते नजर आए। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से पहले ही यात्रा प्लान जारी किया गया था।
आस्था, सेवा और सद्भाव का दिखा संगम
टपकेश्वर महादेव की शोभायात्रा में जहां एक ओर भगवान शिव के जयकारों से देहरादून भक्तिमय नजर आया, वहीं दूसरी ओर जगह जगह लगाए गए भंडारों में सेवा और सद्भाव की तस्वीर भी देखने को मिली। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे।
भव्य झांकियों, भक्ति संगीत, ढोल नगाड़ों और श्रद्धालुओं की आस्था ने देहरादून में ऐसा माहौल बनाया, जिसमें पूरा शहर मानो भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया।


