नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा की यूसीसी पहल को “अंडरग्राउंड कम्युनल कांस्पिरेसी” बताते हुए पहले पुराने चुनावी वादों को पूरा करने की बात कही थी। उनके इस बयान पर भाजपा और एनडीए से जुड़े नेताओं ने पलटवार किया है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा था कि सरकार को पहले पुराने वादे पूरे करने चाहिए और उसके बाद यूसीसी की बात करनी चाहिए। उन्होंने रोजगार, महंगाई, शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी उठाया था।
यूसीसी के बहाने सियासी घमासान, एनडीए नेताओं ने किया पलटवार
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अखिलेश यादव को यूसीसी से पहले यह घोषणा करनी चाहिए कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो मुस्लिम समुदाय से किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
राजभर ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने अतीत में समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया है और उनके अनुसार अब पार्टी को इस समुदाय को नेतृत्व में अवसर देने के बारे में भी बात करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए के घटक दलों को समाजवादी पार्टी की तुलना में कम वोट मिलते हैं, लेकिन उनके मुताबिक समाजवादी पार्टी को मुस्लिम समुदाय के समर्थन का बड़ा लाभ मिला है।
नरेंद्र कश्यप बोले, यूसीसी पर परिभाषा बदलने की कोशिश
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता यूसीसी की परिभाषा को अपने तरीके से पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए थी।
कश्यप ने आरोप लगाया कि यूसीसी के विरोध में समाजवादी पार्टी का रुख उसके राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में फिलहाल यूसीसी लागू नहीं है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक राज्य विधि आयोग को अभी तक राज्य सरकार की ओर से यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।
संजय निषाद ने समान अधिकारों का मुद्दा उठाया
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने यूसीसी के विरोध को लेकर अखिलेश यादव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संविधान सामाजिक न्याय की बात करता है और उनके अनुसार समान नागरिक संहिता तथा समान अधिकार सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
निषाद ने महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाएं भी देश की नागरिक हैं और उन्हें भी समानता, सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
संजय निषाद ने उत्तराखंड, असम और गुजरात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूसीसी को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए। हालांकि इन राज्यों में यूसीसी की कानूनी स्थिति एक जैसी नहीं है। उत्तराखंड में कानून लागू हो चुका है, जबकि गुजरात और असम में संबंधित विधेयकों को लेकर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया चल रही है।
राम कदम ने अखिलेश के बयान पर उठाए सवाल
भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के विधायक राम कदम ने अखिलेश यादव के यूसीसी के नए अर्थ बताए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शब्दों की परिभाषा बदलने के बजाय उनके पीछे की राजनीतिक सोच पर चर्चा होनी चाहिए।
राम कदम ने समान कानून के सवाल को संविधान में समानता के सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
यह आरोप भाजपा नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। अखिलेश यादव की ओर से यूसीसी को लेकर मुख्य तर्क यह रहा है कि सरकार को पुराने वादों और रोजगार, महंगाई तथा महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पहले ध्यान देना चाहिए।
प्रतुल शाहदेव ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा की झारखंड इकाई के नेता प्रतुल शाहदेव ने भी अखिलेश यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने समाजवादी पार्टी की पुरानी राजनीति और अयोध्या आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर कई आरोप लगाए।
शाहदेव ने यूसीसी को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए विवाह और तलाक से संबंधित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के प्रावधानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूसीसी के जरिए ऐसी विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए।
उनके इन बयानों में राजनीतिक आरोप और दावे शामिल हैं, जिन पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के रुख अलग हैं।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने संविधान का हवाला दिया
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 44 पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संविधान कानून के समक्ष समानता की बात करता है और समान नागरिक संहिता का उल्लेख भी संविधान में किया गया है।
अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की बात करता है, जबकि अनुच्छेद 44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है।
यूसीसी को लेकर यूपी में बढ़ी राजनीतिक हलचल
यूसीसी को लेकर ताजा राजनीतिक बयानबाजी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद तेज हुई है जिसमें उन्होंने भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी लागू करने की बात कही थी। इसके बाद अखिलेश यादव ने इस पहल पर सवाल उठाए और भाजपा पर पुराने वादों को पूरा करने से पहले नया मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले यूसीसी अब राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि राज्य में अभी यूसीसी का कोई अंतिम मसौदा सार्वजनिक नहीं हुआ है और राज्य विधि आयोग को सरकार की ओर से मसौदा तैयार करने का औपचारिक अनुरोध मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

