लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसान ऋण से जुड़े रिश्वतखोरी के दो अलग अलग मामलों में सीबीआई की विशेष अदालतों ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दो पूर्व बैंक अधिकारियों समेत तीन दोषियों को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराते हुए चार से पांच वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई के अनुसार, दोनों मामले किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण से जुड़े थे। एक मामले में बैंक शाखा प्रबंधक ने ऋण की पहली किस्त जारी करने के बदले किसान से रिश्वत मांगी थी, जबकि दूसरे मामले में किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मंजूर करने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। दोनों मामलों में सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर आरोपियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
किसान की मजबूरी को बनाया कमाई का जरिया, सीबीआई ने रंगे हाथ दबोचा
पहला मामला 12 मार्च 2018 को सीबीआई ने दर्ज किया था। इस मामले में सुल्तानपुर जिले की बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक की हरिहरपुर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राकेश चंद्र ठाकुर को आरोपी बनाया गया था।
सीबीआई के मुताबिक, एक किसान ने शिकायत की थी कि 4.25 लाख रुपये के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की पहली किस्त जारी करने के लिए बैंक अधिकारी ने उससे 6,000 रुपये रिश्वत की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और रिश्वतखोरी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
कार्रवाई के दौरान सीबीआई की टीम ने राकेश चंद्र ठाकुर को शिकायतकर्ता से 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और साक्ष्य जुटाए गए।
चार साल बाद तय हुए आरोप, अब पांच साल की सजा
सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 10 मई 2018 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में 21 दिसंबर 2020 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए।
मंगलवार को लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक मामलों की विशेष सीबीआई अदालत ने राकेश चंद्र ठाकुर को दोषी ठहराया। अदालत ने उसे पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मंजूर कराने के लिए मांगे थे 15 हजार
रिश्वतखोरी का दूसरा मामला 11 अगस्त 2016 को दर्ज किया गया था। इस मामले में महाराजगंज जिले के पूर्वांचल बैंक की परतावल बाजार शाखा के तत्कालीन सहायक प्रबंधक रवि कुमार गुप्ता को आरोपी बनाया गया था।
सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मंजूर करने के लिए रवि कुमार गुप्ता ने उससे 15 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
जांच के दौरान सामने आया कि बैंक अधिकारी ने कथित तौर पर एक निजी व्यक्ति इंद्रजीत सिंह उर्फ बाबू साहेब के माध्यम से शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत स्वीकार की थी।
निजी व्यक्ति के जरिए रिश्वत लेने का आरोप, दोनों दोषी करार
सीबीआई ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते समय रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई और अदालत के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य पेश किए गए।
मंगलवार को लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने रवि कुमार गुप्ता और इंद्रजीत सिंह को मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने दोनों को चार चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
इसके अलावा अदालत ने दोनों दोषियों पर 40 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई की जांच में मिले पर्याप्त साक्ष्य
सीबीआई ने दोनों मामलों में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों मामलों में आरोपियों को दोषी माना और सजा सुनाई।
इन फैसलों से यह संदेश भी सामने आया है कि किसान ऋण जैसी महत्वपूर्ण बैंकिंग सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने या स्वीकार करने वाले अधिकारियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।



