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वनतारा में जुटे 30 देशों के वन्यजीव विशेषज्ञ! 98 संस्थानों और भारत के 29 चिड़ियाघरों ने मिलाया हाथ, संरक्षण के लिए बनेगी वैश्विक रणनीति

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जामनगर। गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा में 26 से 29 अक्टूबर तक यूरेशियन रीजनल एसोसिएशन ऑफ जूज एंड एक्वेरियम (EARAZA) का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें 30 देशों के 98 संस्थानों और भारत के 29 चिड़ियाघरों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। ‘वन्यजीव संरक्षण के लिए वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वन्यजीव संरक्षण, पशु कल्याण, वैज्ञानिक शोध और आधुनिक तकनीक के माध्यम से विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग देशों से आए वन्यजीव विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, चिड़ियाघर संचालकों और संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके साथ ही संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में पुनर्वास, आपात स्थितियों से निपटने और संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान वनतारा के सीईओ विवान करानी ने घोषणा की कि ANTZ सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म एक साल तक EARAZA के सभी सदस्य संस्थानों को मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा।

रिकी केज की प्रस्तुति के साथ हुआ सम्मेलन का उद्घाटन

सम्मेलन का उद्घाटन तीन बार ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके संगीतकार और पर्यावरणविद् रिकी केज की विशेष प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके बाद EARAZA की अध्यक्ष स्वेतलाना अकुलोवा, भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर रमन सुकुमार और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. वी. क्लेमेंट बेन ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।

इस अवसर पर वनतारा के सीईओ विवान करानी ने ANTZ सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को एक साल तक सभी EARAZA सदस्य संस्थानों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराने की घोषणा की। यह क्लाउड आधारित प्लेटफॉर्म चिड़ियाघरों के प्रबंधन, वन्यजीवों की देखभाल से जुड़ी जानकारी के व्यवस्थित रिकॉर्ड और विभिन्न संस्थानों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद करता है।

विवान करानी ने कहा कि वनतारा का अर्थ जंगल का तारा है, लेकिन पूरे आकाश को रोशन करने के लिए तारों का समूह जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल अपने अनुभव साझा करना नहीं, बल्कि दूसरे संस्थानों से सीखना और सामूहिक प्रयासों के जरिए वन्यजीव संरक्षण को आगे बढ़ाना है।

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EARAZA की अध्यक्ष स्वेतलाना अकुलोवा ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं है। इसके लिए विभिन्न देशों और संस्थानों को अपनी विशेषज्ञता, आंकड़े और जिम्मेदारियां साझा करनी होंगी। भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर रमन सुकुमार ने हाथियों के संरक्षण में वैज्ञानिक शोध, धैर्य और अनुभवों के आदान-प्रदान के महत्व पर जोर दिया। वहीं, डॉ. क्लेमेंट बेन ने कहा कि चिड़ियाघर वन्यजीव संरक्षण के साथ शोध और जन-जागरूकता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

बाघ, स्टॉर्क और ग्रेट बस्टर्ड जैसी प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

सम्मेलन में कई संकटग्रस्त और महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रमों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें अमूर बाघ, ओरिएंटल स्टॉर्क, ब्लैकिस्टन ईगल आउल और ग्रेट बस्टर्ड के संरक्षण से जुड़े प्रयासों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही बोइगा प्रजाति के सांपों और लंबे कानों वाले हेजहॉग को उनके प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने के प्रयासों की जानकारी भी साझा की गई।

विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण के लिए वैश्विक डेटा व्यवस्था विकसित करने, पशु कल्याण का आकलन करने और आपात परिस्थितियों में वन्यजीवों की सुरक्षा जैसे विषयों पर विचार रखे। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वन्यजीवों को सुरक्षित रखने और बचाव व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।

पद्मश्री से सम्मानित हाथी विशेषज्ञ डॉ. के. के. शर्मा ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के अपने अनुभव साझा किए। मॉस्को चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने ध्रुवीय भालुओं के संरक्षण और बचाव से जुड़े अनुभव बताए। वहीं, वन्यजीव विशेषज्ञ फॉरेस्ट गलांटे ने मीडिया के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाने के महत्व पर चर्चा की।

सम्मेलन में शहरी जैव विविधता, नागरिक विज्ञान, वन्यजीवों के निदान, पोषण और चिड़ियाघरों में आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर भी सत्र आयोजित हुए। इसके अलावा EARAZA के सदस्यों ने संगठन की भविष्य की दिशा तय करने के लिए मतदान भी किया।

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विशेष सत्रों में पारदर्शिता और नवाचार पर मंथन

सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों के विचार और अनुभव साझा करने के लिए कई विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘द एलिफेंट इन द रूम’ नामक वीडियो बूथ में विशेषज्ञों ने चिड़ियाघरों के भविष्य और पारदर्शिता के जरिए आम लोगों का भरोसा मजबूत करने जैसे मुद्दों पर अपने विचार रिकॉर्ड किए।

‘सॉल्यूशन स्टेशन’ के माध्यम से वन्यजीव बचाव, आनुवंशिकी, जैव सुरक्षा और पशु कल्याण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान पर सुझाव दिए गए। वहीं, ‘इनोवेशन इन एक्शन’ कार्यक्रम में संरक्षण और पशु देखभाल के क्षेत्र में इस्तेमाल किए जा रहे उपयोगी नवाचारों को साझा किया गया।

सात देशों के 13 प्रदर्शकों ने दिखाईं आधुनिक तकनीकें

सम्मेलन में आयोजित प्रदर्शनी में सात देशों के 13 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। इसमें वन्यजीवों के उपचार, जांच, संरक्षण प्रजनन और पशु देखभाल से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनी में कार्ल स्टोर्ज की एंडोस्कोपी तकनीक, IDEXX की जांच सुविधाएं, इन्वेंटा सिस्टम्स के जीनोमिक्स उपकरण और सिगट्यूपल की एआई आधारित माइक्रोस्कोपी तकनीक प्रदर्शित की गई। इसके अलावा IMV इमेजिंग की संरक्षण प्रजनन तकनीकें, ग्रुम्बाक की अंडे सेने वाली प्रणालियां और डैनइंजेक्ट के दूर से दवा देने वाले उपकरण भी आकर्षण का केंद्र रहे।

ट्राइब्स इंडिया ने पारंपरिक जनजातीय कला, वस्त्र और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया। वहीं, वनतारा के पवेलियन में वन्यजीवों की देखभाल, पोषण, वास्तुकला और तकनीक से जुड़ी जानकारियों के साथ वर्चुअल रियलिटी अनुभव भी प्रस्तुत किया गया।

ANTZ प्लेटफॉर्म में एआई और स्मार्ट तकनीक का प्रदर्शन

ANTZ प्लेटफॉर्म के तहत कई आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। इनमें ‘वेस्पर’ नामक उपकरण शामिल है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से ध्वनियों का विश्लेषण कर विभिन्न प्रजातियों की पहचान करने में सक्षम है।

‘स्मार्ट एग एनालिसिस’ तकनीक के जरिए अंडों का माप लेने, उनकी आंतरिक स्थिति देखने और धड़कन की जांच करने की सुविधा प्रदर्शित की गई। इसके अलावा NFC तकनीक से लैस उपकरण भी दिखाया गया, जिसकी मदद से देखभाल कर्मचारी केवल टैप करके अपने कार्यों का रिकॉर्ड दर्ज कर सकते हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीकें चिड़ियाघरों में पशुओं की निगरानी, देखभाल और प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।

इंडियन जू ईयर बुक का विमोचन, छह विशेषज्ञों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

सम्मेलन के दौरान ‘इंडियन जू ईयर बुक’, वॉल्यूम 11, 2026 का विमोचन भी किया गया। 29 अक्टूबर को आयोजित समापन समारोह में वनतारा की ओर से छह विशेषज्ञों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना निर्धारित था।

सम्मानित होने वाले विशेषज्ञों में मॉस्को चिड़ियाघर की महानिदेशक और EARAZA अध्यक्ष स्वेतलाना अकुलोवा, चेक गणराज्य के चेलेबी चिड़ियाघर के संस्थापक रेने फ्रानेक और बाकू जूलॉजिकल पार्क के निदेशक एवं EARAZA के उपाध्यक्ष अजर हुसैनोव शामिल हैं।

रेने फ्रानेक के चिड़ियाघर ने चेक गणराज्य में पहली बार लाल गाल वाले डौक लंगूरों और राइनो हॉर्नबिल पक्षियों का सफल प्रजनन कराया है। भारत से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के संस्थापक सदस्य सचिव एस. सी. शर्मा तथा पूर्व सदस्य सचिव डॉ. डी. एन. सिंह और बी. एस. बोनाल को भी सम्मानित किया जाना है।

समापन समारोह के दौरान EARAZA का ध्वज वर्ष 2027 के सम्मेलन की मेजबानी करने वाले संस्थान को सौंपा जाएगा।

24 देशों के 95 सदस्य संस्थानों का संगठन है EARAZA

EARAZA के 24 देशों में 95 सदस्य संस्थान हैं। यह संगठन वन्यजीव संरक्षण, पशु कल्याण, वैज्ञानिक शोध और शिक्षा के क्षेत्रों में विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

जामनगर स्थित वनतारा वन्यजीवों के बचाव, देखभाल और संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवास के भीतर और बाहर, दोनों स्तरों पर काम करता है। सम्मेलन में विभिन्न देशों के विशेषज्ञों की भागीदारी को वन्यजीव संरक्षण के साझा प्रयासों, वैज्ञानिक सहयोग और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

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