नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, निवेश, पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की तिथियों, नक्षत्रों और मुहूर्त की जानकारी दी जाती है।
14 सितंबर को तृतीया के बाद लगेगी चतुर्थी
14 सितंबर 2026 को सोमवार के दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष संयोग बन रहा है। गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज का पर्व इस दिन एक साथ पड़ रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करना शुभ और फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
14 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 16 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 28 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 8 बजकर 59 मिनट पर होगा और चंद्रास्त शाम 8 बजकर 22 मिनट पर होगा।
दिन की शुरुआत धार्मिक कार्यों और पूजा पाठ के लिए शुभ समय को ध्यान में रखते हुए की जा सकती है। हालांकि किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का मिलान करना उचित माना जाता है।
चित्रा के बाद स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेगा चंद्रमा
पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा दोपहर 1 बजकर 57 मिनट तक चित्रा नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
ज्योतिषीय गणना में तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी आधार पर शुभ कार्यों और धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुकूल समय का निर्धारण किया जाता है।
ब्रह्म योग के बाद शुरू होगा ऐन्द्र योग
सोमवार को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक ब्रह्म योग रहेगा। इसके बाद ऐन्द्र योग शुरू होगा। धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करना कई परंपराओं में विशेष फलदायी माना जाता है।
अमृत काल में भी कर सकते हैं शुभ कार्य
14 सितंबर को अमृत काल सुबह 7 बजकर 17 मिनट से 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अमृत काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है।
इस दौरान पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि किसी विशेष पूजा की विधि और मुहूर्त के लिए संबंधित धार्मिक परंपरा के अनुसार समय निर्धारित करना उचित रहेगा।
राहुकाल और अन्य अशुभ समय का रखें ध्यान
पंचांग के अनुसार सोमवार को राहुकाल सुबह 7 बजकर 48 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 53 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा।
यमगंड काल सुबह 10 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल को नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। इसलिए इन अवधियों में महत्वपूर्ण नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सिंह राशि में सूर्य, तुला राशि में चंद्रमा
14 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति दिन की ज्योतिषीय गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
पंचांग में ग्रहों की स्थिति के साथ तिथि, नक्षत्र, योग और करण का भी विशेष महत्व होता है। इन्हीं गणनाओं के आधार पर शुभ मुहूर्त और धार्मिक गतिविधियों के लिए समय का विचार किया जाता है।
पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल
सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश पूर्व दिशा की ओर यात्रा करना आवश्यक हो तो मान्यताओं के अनुसार विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर यात्रा शुरू की जा सकती है।
एक ही दिन धार्मिक आस्था के दो प्रमुख पर्व
14 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज का संयोग बन रहा है। भगवान गणेश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का अवसर होने से श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।
पंचांग के अनुसार तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालु अपनी धार्मिक गतिविधियों की योजना बना सकते हैं। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना में अंतर संभव होने के कारण किसी विशेष पूजा या व्रत के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
