नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश या नए काम की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तैयार होने वाली हिंदू कालगणना पद्धति है। इसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त और विभिन्न शुभ-अशुभ मुहूर्तों की जानकारी दी जाती है।
17 अगस्त 2026 को सोमवार का दिन है। इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शाम 5 बजे तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। खास बात यह है कि इस दिन सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे बेहद शुभ और विशेष संयोग माना जा रहा है। सावन सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा का विधान है।
सावन सोमवार और नाग पंचमी का अद्भुत संयोग
17 अगस्त को सावन के तीसरे सोमवार के साथ नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।
इस विशेष संयोग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना गया है। मंदिरों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने के साथ नाग देवता का पूजन किया जा सकता है।
पंचमी तिथि शाम 5 बजे तक
पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि शाम 5 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए नाग पंचमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पंचमी तिथि के समय का विशेष महत्व रहेगा।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
17 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 54 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर और चंद्रास्त रात 9 बजकर 50 मिनट पर होगा।
अभिजित मुहूर्त में शुभ कार्य करना रहेगा फलदायी
17 अगस्त को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अभिजित मुहूर्त को दिन के अत्यंत शुभ समयों में शामिल किया जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करना अनुकूल माना जाता है।
इसके अलावा अमृत काल रात 10 बजकर 15 मिनट से 11 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। धार्मिक कार्यों और विशेष पूजा के लिए भी इस अवधि को शुभ माना जाता है।
राहुकाल और अन्य अशुभ समय
17 अगस्त को राहुकाल सुबह 7 बजकर 43 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 6 मिनट से शाम 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। वहीं यमगंड काल सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि पूजा पाठ और नियमित धार्मिक गतिविधियों के लिए इन समयों को लेकर अलग-अलग परंपराएं भी प्रचलित हैं।
सूर्य सिंह और चंद्रमा कन्या राशि में रहेंगे
17 अगस्त को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा। पंचांग के अनुसार सूर्य मघा नक्षत्र में और चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा।
इस दिन हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि अगले दिन सुबह 3 बजकर 29 मिनट तक शुभ योग रहने की जानकारी पंचांग में दी गई है।
पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल
17 अगस्त सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल के दौरान संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारण से पूर्व दिशा की ओर यात्रा करना आवश्यक हो तो परंपरागत ज्योतिषीय उपायों के बाद यात्रा शुरू करने की मान्यता है।
पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए खास दिन
सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का ध्यान कर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। नाग देवता की पूजा करते समय भी धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं का पालन करना उचित माना जाता है।
17 अगस्त का यह संयोग भगवान शिव की आराधना और नाग देवता की पूजा के लिए विशेष अवसर प्रदान करेगा। पंचांग में दिए गए शुभ मुहूर्तों को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालु अपनी धार्मिक गतिविधियों का समय निर्धारित कर सकते हैं।



