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7 नवंबर का पंचांग: सुबह 9:25 से 10:47 बजे तक रहेगा राहुकाल, पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचें; जानें शुभ मुहूर्त और अशुभ समय

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश और पूजा-पाठ की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ-अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित हिंदू काल-गणना की पद्धति है। शनिवार, 7 नवंबर को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा, जबकि दिशाशूल पूर्व दिशा में है।

तिथि, सूर्योदय और सूर्यास्त

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर शनिवार सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी, जो 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे तक रहेगी। शनिवार को सूर्योदय सुबह 6:39 बजे और सूर्यास्त शाम 5:41 बजे होगा। चंद्रोदय तड़के 4:39 बजे और चंद्रास्त शाम 4:18 बजे होगा।

सूर्य रहेंगे विशाखा नक्षत्र में, शनिवार को प्रीति योग

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य देव विशाखा नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि हैं। इस नक्षत्र को महत्वाकांक्षा, अधिकार और लक्ष्य प्राप्ति की इच्छा से जोड़कर देखा जाता है। राजनीति, प्रशासन, कानून, प्रबंधन और प्रतिस्पर्धा से जुड़े क्षेत्रों में इसे विशेष प्रभाव वाला माना जाता है।

शनिवार को प्रीति योग रहेगा, जो अगले दिन तड़के 3:27 बजे तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में प्रीति योग को 27 नित्य योगों में दूसरा स्थान दिया गया है। इसके अधिष्ठाता देवता भगवान विष्णु और प्रमुख ग्रह बुध माने जाते हैं। मान्यता है कि इस योग में जन्म लेने वाले जातक सौम्य, मिलनसार, आकर्षक और मधुरभाषी स्वभाव के होते हैं।

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अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का समय

शनिवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा। इसे दिन का अत्यंत शुभ समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्यों की शुरुआत करना फलदायी होता है।

वहीं, अमृतकाल रात 11:09 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना गया है। इस दौरान नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण कार्य करना अच्छा माना जाता है।

राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल

शनिवार को राहुकाल सुबह 9:25 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस अवधि को नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

यमगंड काल दोपहर 1:33 बजे से 2:56 बजे तक रहेगा। इस समय को भी नए कार्यों की शुरुआत और महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए अशुभ माना जाता है।

गुलिक काल सुबह 6:39 बजे से 8:02 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए काम शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

तुला राशि में रहेंगे सूर्य, शाम को चंद्रमा का राशि परिवर्तन

शनिवार को सूर्य तुला राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस स्थिति में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति प्रभावित हो सकती है।

चंद्र देव इस दिन कन्या राशि में रहेंगे और शाम 5:15 बजे तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कन्या राशि में चंद्रमा के रहने पर व्यक्ति भावनाओं के बजाय तर्क और विश्लेषण को अधिक महत्व देता है। तुला राशि में प्रवेश के बाद चंद्रमा की स्थिति में बदलाव माना जाता है।

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पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना अशुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन पूर्व दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

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