नई दिल्ली। नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित विवेक ऑडिटोरियम में मंगलवार को इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स यानी आईसीडब्ल्यूए के राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा मिलने के 25 वर्ष पूरे होने पर सिल्वर जुबली समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आईसीडब्ल्यूए की 25वीं वर्षगांठ केवल उसकी अब तक की यात्रा को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका पर विचार करने का भी समय है। उन्होंने कहा कि भारत और दुनिया दोनों तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भारत की अपनी बौद्धिक समझ और वैश्विक विमर्श में भागीदारी को और मजबूत करना जरूरी है।
1943 से अंतरराष्ट्रीय मामलों पर काम कर रहा आईसीडब्ल्यूए
जयशंकर ने कहा कि वर्ष 1943 में स्थापना के बाद से आईसीडब्ल्यूए अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन और उनके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम करता रहा है। वर्ष 2001 में संसद ने इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा दिया था।
उन्होंने कहा कि यह दर्जा दुनिया से जुड़े मुद्दों पर भारत की बौद्धिक भागीदारी में आईसीडब्ल्यूए के विशेष योगदान की पहचान था। अब 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संस्था को अपनी भविष्य की भूमिका को लेकर भी नए सिरे से विचार करना चाहिए।
दुनिया में भारत की बढ़ी सक्रियता
विदेश मंत्री ने कहा कि आज भारत पहले की तुलना में दुनिया के कहीं अधिक देशों और क्षेत्रों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। भारत के राष्ट्रीय हित पहले से कहीं अधिक वैश्विक हो गए हैं। इसके साथ ही देश की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और दुनिया की भारत से अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत अब वैश्विक चुनौतियों पर पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख रहा है। खासकर ऐसे मुद्दों पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है, जिनका प्रभाव पूरी मानवता पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भारतीय दृष्टिकोण जरूरी
जयशंकर ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया में भारत की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर देश की बौद्धिक समझ और भागीदारी को भी उसी गति से आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लंबे समय से चली आ रही पारंपरिक सोच और चर्चाएं काफी हद तक दूसरे देशों के अनुभवों तथा वहां विकसित हुए विचारों पर आधारित रही हैं। ऐसे में उभरते भारत को दुनिया को देखने और समझने के अपने तरीके में अपनी बुद्धिमत्ता, अनुभव, हितों और विचारों को शामिल करना होगा।
अपनी शब्दावली और नजरिए से दुनिया को समझे भारत
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को केवल दूसरों की ओर से बनाए गए ढांचों के आधार पर दुनिया को समझने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। देश को अपनी सोच, अनुभव और दृष्टिकोण के साथ वैश्विक विमर्श में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अपनी शब्दावली और अपना नजरिया विकसित करने की आवश्यकता है। इससे वैश्विक मुद्दों को भारतीय दृष्टिकोण से समझने और देश के हितों के अनुरूप नीतिगत विकल्प तलाशने में मदद मिलेगी।
आईसीडब्ल्यूए की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
जयशंकर ने कहा कि इस पूरे प्रयास में आईसीडब्ल्यूए की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय दृष्टिकोण से जानकारीपूर्ण और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देकर संस्था देश को यह समझने में मदद कर सकती है कि उसके सामने कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि आईसीडब्ल्यूए भारत के दृष्टिकोण को दुनिया के सामने अधिक आत्मविश्वास के साथ रखने में भी योगदान दे सकता है। उभरते हुए राष्ट्र के विकास के दौरान होने वाली बहसों और चर्चाओं में संस्था को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
ब्रिक्स घोषणा को उपराष्ट्रपति ने बताया बड़ी उपलब्धि
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाए गए ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ को बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि घोषणा में कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इनमें सभी को साथ लेकर चलने वाली वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सर्वसम्मति से पारित यह घोषणा भारत के लिए महत्वपूर्ण सफलता है।
बदलती विश्व व्यवस्था में भारत का बढ़ता प्रभाव
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि आने वाले समय में विश्व व्यवस्था में बदलाव जारी रहेगा। उनके मुताबिक भारत आज दुनिया के साथ पहले से ज्यादा सक्रिय रूप से जुड़ रहा है और उसका वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया में भारत को लगातार शांति, प्रगति और समृद्धि की आवाज के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक मंच पर भारतीय सोच को मजबूत करने की जरूरत
आईसीडब्ल्यूए की सिल्वर जुबली के मौके पर दिए गए बयानों से यह संकेत मिला कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ देश की अपनी बौद्धिक और रणनीतिक क्षमता को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत के सामने वैश्विक स्तर पर बढ़ती जिम्मेदारियों और बदलती विश्व व्यवस्था के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को अपने अनुभव और राष्ट्रीय हितों के नजरिए से देखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ऐसे में आईसीडब्ल्यूए जैसे संस्थानों की भूमिका नीति, शोध और वैश्विक विमर्श के स्तर पर और महत्वपूर्ण हो सकती है।
