गौतम बुद्ध नगर। भारतीय किसान यूनियन की ओर से सोमवार को गौतम बुद्ध नगर में आयोजित किसान महापंचायत में जिले के सैकड़ों गांवों से हजारों किसान, महिलाएं और युवा पहुंचे। महापंचायत में किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। कार्यक्रम को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने संबोधित किया और किसानों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
महापंचायत के बाद बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए यमुना प्राधिकरण कार्यालय के सामने पहुंचे। किसानों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया और आंदोलन को लेकर सख्ती की गई। इसके विरोध में किसान सड़क पर ही बैठ गए और पुलिस प्रशासन तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बड़ी संख्या में किसानों के एकत्र होने से मौके पर माहौल गरम रहा।
महापंचायत में उमड़ा किसानों का हुजूम
किसान महापंचायत में गौतम बुद्ध नगर के अलग-अलग गांवों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। किसानों के साथ महिलाओं और युवाओं की भी भागीदारी रही। महापंचायत के दौरान किसानों ने अपनी समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
किसान नेताओं ने कहा कि विकास परियोजनाओं और प्राधिकरणों से जुड़े कई मामलों में किसान लंबे समय से समाधान की मांग कर रहे हैं। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होने से किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।
राकेश टिकैत ने कहा, मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे
महापंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने किसानों के आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना जारी रहेगा।”
टिकैत ने आरोप लगाया कि किसानों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। प्राधिकरणों की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ वादाखिलाफी किए जाने से नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग
महापंचायत में किसानों ने 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाया। किसानों का कहना है कि जिन किसानों की जमीन विकास परियोजनाओं और अधिग्रहण की प्रक्रिया में गई है, उन्हें नियमानुसार उनका अधिकार और उचित लाभ मिलना चाहिए।
किसानों ने मुआवजे से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निस्तारण करने की मांग प्रशासन के सामने रखी।
10 प्रतिशत किसान कोटा के प्लॉट का मुद्दा भी गरमाया
किसानों ने 10 प्रतिशत किसान कोटा के प्लॉट से जुड़े लंबित मामलों का तत्काल समाधान करने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों से जुड़े प्लॉट के मामलों को लंबे समय तक लंबित रखना उनके हितों के साथ न्याय नहीं है।
इसके साथ ही आबादी से जुड़े मामलों का भी जल्द निस्तारण करने की मांग की गई। किसान नेताओं ने कहा कि आबादी के मामलों में स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है।
खाद की कथित कालाबाजारी रोकने की मांग
महापंचायत में क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाजारी का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और यदि कहीं कालाबाजारी हो रही है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।
किसानों का कहना है कि कृषि कार्य के दौरान खाद की पर्याप्त उपलब्धता बेहद जरूरी है और किसानों को निर्धारित दरों पर खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
नहरों में पर्याप्त पानी और बिजली दरें कम करने की मांग
किसानों ने क्षेत्र की नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है। किसानों ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
इसके अलावा बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस लेने की मांग भी महापंचायत में प्रमुखता से उठाई गई। किसानों ने कहा कि खेती की लागत पहले ही बढ़ रही है और बिजली की दरों में बढ़ोतरी से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जमीन अधिग्रहण की नीति स्पष्ट करने की मांग
किसानों ने जमीनों के गलत तरीके से किए गए अधिग्रहण को लेकर प्रशासन से अपनी नीति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में गई है, उनके अधिकारों और हितों की रक्षा की जानी चाहिए।
किसान नेताओं ने कहा कि अधिग्रहण के मामलों में नियमानुसार मुआवजा और अन्य लाभ किसानों को मिलना चाहिए तथा लंबित मामलों का जल्द समाधान होना चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट में स्थानीय युवाओं को रोजगार की मांग
महापंचायत में जेवर एयरपोर्ट से जुड़े रोजगार का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। किसानों ने मांग की कि क्षेत्र के युवाओं को एयरपोर्ट और उससे जुड़ी परियोजनाओं में रोजगार के अवसर दिए जाएं।
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बड़े स्तर पर विकास परियोजनाएं आ रही हैं, ऐसे में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि विकास का लाभ प्रभावित क्षेत्र के लोगों को भी मिल सके।
भूमिहीन किसानों के लिए 120 वर्ग मीटर के प्लॉट की मांग
महापंचायत में भूमिहीन किसानों के लिए 120 वर्ग मीटर के प्लॉट उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के कारण जिन परिवारों की जमीन चली गई या जो भूमिहीन हो गए, उनके पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
किसान नेताओं ने कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मामलों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जमीन और आवास से संबंधित वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।
तीनों प्राधिकरणों के बाहर डटे किसान
भारतीय किसान यूनियन के अनुसार, किसान अपनी मांगों को लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण, तीनों प्राधिकरणों के बाहर आंदोलन कर रहे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राकेश टिकैत ने किसानों से जुड़े मुद्दों के स्थायी समाधान पर जोर देते हुए कहा कि किसान अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन बढ़ाने का संकेत
किसान नेताओं ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। महापंचायत के बाद किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने प्रशासन के सामने उनकी नाराजगी को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।
अब किसानों की नजर प्रशासन और सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

