नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को अपनी पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा संकेत दिया। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और संभावित गठबंधन को लेकर फैसला 2 अक्टूबर तक घोषित कर दिया जाएगा।
ओवैसी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक रूप से अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों से मिलकर काम करने पर विचार करने की अपील की और कहा कि किसी एक राजनीतिक दल के लिए अकेले भाजपा का मुकाबला करना संभव नहीं है।
2 अक्टूबर तक गठबंधन पर तस्वीर होगी साफ
ओवैसी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि AIMIM 2 अक्टूबर तक यह स्पष्ट कर देगी कि वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किस दल या दलों के साथ गठबंधन करेगी। हालांकि, अभी तक संभावित गठबंधन में शामिल होने वाली पार्टियों या सीटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
AIMIM प्रमुख ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी समान राजनीतिक सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्षी दलों से बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही है।
‘पूरी तरह तैयार है AIMIM’
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भरोसा जताया कि AIMIM के उम्मीदवार इस बार विधानसभा तक पहुंचेंगे।
उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने और राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में लोगों तक पहुंच बनाने का काम कर रही है। ओवैसी के मुताबिक, AIMIM का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं बल्कि राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी को विस्तार देना भी है।
AIMIM की ओर से हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में जनसभाएं और संगठनात्मक गतिविधियां तेज की गई हैं। पार्टी ने आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए कई विधानसभा क्षेत्रों में अपने कार्यक्रमों का सिलसिला बढ़ाया है।
मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बनाया प्रमुख मुद्दा
ओवैसी ने अपने बयान में मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग समुदायों का अपना राजनीतिक नेतृत्व है, लेकिन बड़ी आबादी होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक स्तर पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की कोशिश है कि मुस्लिम समुदाय के भीतर से नेतृत्व उभरे और विधानसभा में उसकी राजनीतिक आवाज मजबूत हो। यह ओवैसी और AIMIM की राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में सामने आया है।
‘भाजपा को अकेले नहीं रोक सकता कोई दल’
ओवैसी ने विपक्षी एकता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल भाजपा को सत्ता में लौटने से रोकना चाहते हैं तो उन्हें एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने पर विचार करना चाहिए।
ओवैसी ने समान विचारधारा वाले दलों को AIMIM के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी एक राजनीतिक दल अकेले भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकता। उनके इस बयान को आगामी चुनाव के लिए विपक्षी गठजोड़ की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह ओवैसी का राजनीतिक आकलन है। चुनावी नतीजों या किसी गठबंधन की प्रभावशीलता को लेकर अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।
कानपुर रैली के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
ओवैसी ने हाल ही में कानपुर में जनसभा को संबोधित किया था। इसी दौरान उन्होंने विपक्षी दलों को AIMIM के साथ हाथ मिलाने का संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई दल भाजपा को सत्ता में आने से रोकना चाहता है तो वह AIMIM के साथ बातचीत कर सकता है।
कानपुर कार्यक्रम के बाद ओवैसी की ओर से 2 अक्टूबर की समयसीमा का ऐलान गठबंधन की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किस पार्टी के साथ बातचीत चल रही है और संभावित सीटों का क्या फॉर्मूला हो सकता है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
यूपी में संगठन विस्तार पर AIMIM का जोर
2027 के चुनाव को देखते हुए AIMIM उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के कार्यक्रम उन क्षेत्रों में भी आयोजित किए जा रहे हैं जहां उसका राजनीतिक आधार विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, AIMIM की ओर से श्रावस्ती, आजमगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी गठबंधन पर फैसला चाहे जो करे, अपना संगठनात्मक अभियान जारी रखने की तैयारी में है।
बिहार के अनुभव का भी दिया हवाला
ओवैसी ने गठबंधन के संदर्भ में बिहार के पिछले चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां AIMIM ने विपक्षी दलों के साथ सीटों को लेकर बातचीत की थी, लेकिन समझौता नहीं हो सका।
अब उत्तर प्रदेश में पार्टी की रणनीति यह है कि संभावित गठबंधन को लेकर समय रहते स्थिति स्पष्ट की जाए। ओवैसी की ओर से 2 अक्टूबर की तारीख घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच संभावित समीकरणों पर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।
गठबंधन हुआ तो क्या होगा, अभी तस्वीर साफ नहीं
फिलहाल AIMIM ने किसी सहयोगी दल का नाम आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगा कि पार्टी किस गठबंधन में शामिल होगी या किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
ओवैसी का स्पष्ट संदेश है कि पार्टी चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है और गठबंधन के विकल्प खुले रखे गए हैं। अब सबकी नजर 2 अक्टूबर पर रहेगी, जब AIMIM की ओर से संभावित गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस घोषणा के साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन और सीटों के समीकरणों को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

