नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर हिंदू काल गणना की जानकारी देता है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रहेगी। इसी दिन अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा।
अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विधान
25 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन संकटों से रक्षा और सुख समृद्धि की कामना से हाथ में अनंत सूत्र बांधा जाता है।
मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा कर परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
शुक्रवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 16 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 27 मिनट पर होगा और अगले दिन तड़के 5 बजकर 42 मिनट पर चंद्रास्त होगा।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे सूर्य
पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेंगे। उत्तराफाल्गुनी आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र माना जाता है। इसका विस्तार सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री तक बताया गया है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं, जबकि इसके देवता अर्यमा हैं, जिन्हें देवताओं और पितरों के प्रमुख के रूप में जाना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों में तेजस्विता, महत्वाकांक्षा, परोपकार और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण देखे जाते हैं।
दोपहर तक रहेगा शूल योग
शुक्रवार को दोपहर करीब 2 बजकर 49 मिनट तक शूल योग रहेगा। ज्योतिष पंचांग में शूल को 27 नित्य योगों में नौवां योग बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यता में इसे संघर्षकारी और सामान्यतः अशुभ योग माना जाता है।
शूल शब्द का अर्थ कांटा, भाला या नुकीला अस्त्र होता है। सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थितियों से शूल योग बनने की गणना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस योग के दौरान नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
अभिजीत मुहूर्त में बनेंगे शुभ कार्यों के योग
25 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पंचांग में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समय में शामिल किया जाता है। इसकी अवधि सामान्यतः करीब 48 मिनट होती है।
मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में किए गए शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं। धार्मिक दृष्टि से इस अवधि को महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है।
अमृतकाल का समय
शुक्रवार को अमृतकाल तड़के 3 बजकर 23 मिनट से सुबह 5 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस दौरान पूजा पाठ, महत्वपूर्ण कार्य, व्यापारिक गतिविधियों और अन्य शुभ कार्यों को करने की मान्यता है।
राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचें
25 सितंबर को राहुकाल सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है। स्थान के अनुसार राहुकाल के समय में अंतर हो सकता है। मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
गुलिक काल में नए कार्य से बचने की मान्यता
शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7 बजकर 49 मिनट से 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है।
हालांकि इस अवधि को लेकर अलग अलग परंपराओं में मान्यताएं मिलती हैं। कुछ ज्योतिषीय मतों में पहले से चल रहे कार्य जारी रखने और कुछ विशेष प्रकार के कार्य करने को लेकर अलग विचार बताए गए हैं।
यमगंड काल में यात्रा से बचने की मान्यता
25 सितंबर को यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से शाम 4 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यमगंड काल को नए कार्य की शुरुआत और यात्रा के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण यात्रा पर निकलने या किसी नए काम की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। अलग अलग पंचांग परंपराओं में इस अवधि के प्रभाव को लेकर मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।
कन्या राशि में रहेंगे सूर्य
शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में रहने के दौरान व्यावहारिकता, योजना और व्यवस्थित तरीके से काम करने पर जोर दिया जाता है। इस अवधि को कामकाज से जुड़े मामलों में योजनाबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कुंभ राशि में रहेगा चंद्रमा
इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कुंभ राशि में चंद्रमा की स्थिति आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यक्षमता से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकती है।
नौकरीपेशा लोगों को अपनी क्षमता दिखाने के अवसर मिलने की मान्यता है। वहीं व्यापार से जुड़े लोगों के लिए नई रणनीति और योजनाओं पर काम करने का समय बताया गया है। नए संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना को भी ज्योतिषीय दृष्टि से जोड़ा जाता है।
पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल
शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु संबंधी मान्यताओं में दिशाशूल का अर्थ उस दिशा से है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अनुकूल नहीं माना जाता। शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।
25 सितंबर 2026 का प्रमुख पंचांग एक नजर में
तिथि: भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी, रात 11:07 बजे तक
पर्व: अनंत चतुर्दशी
सूर्योदय: सुबह 6:20 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:16 बजे
चंद्रोदय: शाम 5:27 बजे
चंद्रास्त: तड़के 5:42 बजे
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
शूल योग: दोपहर 2:49 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक
अमृतकाल: तड़के 3:23 बजे से सुबह 5:00 बजे तक
राहुकाल: सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:49 बजे से 9:19 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 3:17 बजे से शाम 4:47 बजे तक
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: कुंभ
दिशाशूल: पश्चिम

