नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा पाठ, यात्रा, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल गणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य खगोलीय स्थितियों के आधार पर दिन के विभिन्न समय और योग निर्धारित किए जाते हैं।
28 सितंबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शाम 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। सोमवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 12 मिनट पर होगा। चंद्रोदय शाम 7 बजकर 56 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 9 बजकर 46 मिनट पर होगा।
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त नक्षत्र को 13वां नक्षत्र माना गया है। हस्त का अर्थ हाथ होता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा माने जाते हैं और इसकी राशि कन्या है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, हस्त नक्षत्र में सूर्य की स्थिति का प्रभाव सभी राशियों पर अलग अलग रूप में पड़ सकता है।
इस दिन हर्षण योग भी बन रहा है। हर्षण योग सोमवार सुबह 6 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तड़के 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में हर्षण को 27 नित्य योगों में 14वां योग माना जाता है। हर्षण शब्द का अर्थ खुशी, प्रसन्नता या आनंद से जुड़ा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसे सकारात्मक और शुभ योग माना जाता है।
मान्यता है कि हर्षण योग में उत्सव, विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण और नए व्यापार की शुरुआत जैसे कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि किसी भी शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार मुहूर्त की गणना अलग हो सकती है।
28 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। पंचांग परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है। सामान्य तौर पर इसकी अवधि करीब 48 मिनट मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों के लिए सकारात्मक फल की कामना की जाती है।
सोमवार को अमृत काल सुबह 3 बजकर 05 मिनट से 4 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता में अमृत काल को शुभ और मंगलकारी समय माना जाता है। इस दौरान पूजा पाठ, महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा, व्यापार और अन्य शुभ गतिविधियां करने की परंपरा रही है।
वहीं, सोमवार को राहुकाल शाम 3 बजकर 15 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में राहुकाल को नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। मान्यता के अनुसार इस अवधि में नया काम शुरू करने के बजाय पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। राहुकाल का समय स्थान और सूर्योदय सूर्यास्त के समय के अनुसार बदलता है।
इस दिन गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपराओं में गुलिक काल को भी महत्वपूर्ण समय माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दौरान नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
सोमवार को यमगंड काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यमगंड को नए कार्य, विशेष रूप से यात्रा और महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता। इस अवधि में नए कार्य की शुरुआत से बचने की परंपरा है।
ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सोमवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कन्या राशि में सूर्य की स्थिति के दौरान व्यावहारिक सोच और योजनाबद्ध तरीके से काम करने पर जोर दिया जाता है। वहीं चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेंगे।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है, जबकि मेष राशि के स्वामी मंगल हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष राशि में चंद्रमा की स्थिति ऊर्जा, उत्साह और साहस से जुड़ी हो सकती है। इसके साथ ही मन की चंचलता और भावनात्मक उतार चढ़ाव की संभावना भी बताई जाती है।
28 सितंबर को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक पंचांग में दिशाशूल का उल्लेख यात्रा से संबंधित मान्यताओं के संदर्भ में किया जाता है। सोमवार को उत्तर दिशा की यात्रा को लेकर दिशाशूल माना गया है।
इस प्रकार 28 सितंबर 2026 का दिन तृतीया तिथि, हस्त नक्षत्र और हर्षण योग के साथ विशेष पंचांग संयोग वाला दिन है। दिन में अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल जैसे शुभ समय रहेंगे, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के समय नई शुरुआत से बचने की धार्मिक मान्यता है। अलग अलग स्थानों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त और काल की गणना में कुछ अंतर संभव है।

