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उत्तर प्रदेश में विकास के नए कीर्तिमान, साढ़े नौ साल में खत्म हुई बीमारू राज्य की छवि: योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विकास, प्रशासनिक सुधार और सुशासन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया है कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की बीमारू राज्य वाली छवि समाप्त हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बाधाओं से निकलकर विकास की नई संभावनाओं को साकार करने वाले राज्य के रूप में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में प्रशासनिक, आर्थिक और संस्थागत ढांचे को नए सिरे से मजबूत किया जा रहा है, जिससे विकास के नित्य नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में शुरू होने वाली दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 से पहले सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में दक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण शर्त बताया। उन्होंने कहा कि शासन की सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होता है कि आम नागरिक के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक कितना प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।

प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव को बताया जरूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था तभी सार्थक साबित होती है, जब उसका सीधा लाभ जनता को मिले। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कर आम लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। इस प्रक्रिया में लोक सेवकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि जब प्रशासनिक तंत्र दक्ष, संवेदनशील और उत्तरदायी होता है, तभी शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच पाता है। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता और जनता के प्रति जवाबदेही सुशासन को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनकी कार्यसंस्कृति में भी सकारात्मक बदलाव जरूरी है। इसी दिशा में सरकार प्रशासनिक तंत्र को आधुनिक, परिणामोन्मुखी और जनकल्याण के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर दे रही है।

पूर्ववर्ती सपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार को प्राथमिकता दिए जाने से प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता, कार्यकुशलता और कार्यसंस्कृति प्रभावित हुई थी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अपराध, माफियाराज, नीतिगत उदासीनता और प्रदेश की पहचान को लेकर पैदा हुए संकट ने उत्तर प्रदेश की विकास संभावनाओं को बाधित किया। उनके मुताबिक, प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पाने के कारण राज्य को लंबे समय तक पिछड़ेपन की छवि से जूझना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और विकास की गति तेज करने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार की नीतियों को उत्तर प्रदेश की बदलती पहचान और विकास यात्रा से जोड़ते हुए इसे महत्वपूर्ण परिवर्तन बताया।

साढ़े नौ वर्षों में बीमारू छवि से बाहर निकलने का दावा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को नई दिशा दे रही है। उन्होंने मिशन कर्मयोगी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से लोक सेवकों की क्षमता विकसित करने और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर विकास की नई राह पर आगे बढ़ने का सफर तय किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के इस बदलाव को बाधाओं से अवसरों की ओर बढ़ने वाली ऐतिहासिक यात्रा बताया।

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उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश अब अपनी प्रशासनिक, आर्थिक और संस्थागत संरचना को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। शासन व्यवस्था में सुधार, नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के प्रयासों से प्रदेश की विकास क्षमता को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाना होगा। सरकार की प्राथमिकता ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है, जिसमें योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से जनता तक पहुंचे और सरकारी तंत्र परिणाम देने के लिए जवाबदेह बने।

लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक सुधारों और कार्यसंस्कृति में बदलाव की इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 का शुभारंभ किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार जितेंद्र सिंह की उपस्थिति रहेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि कार्यक्रम में आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता होगी। इस आयोजन का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को बेहतर बनाने, लोक सेवकों की क्षमता विकसित करने और सुशासन की अवधारणा को अधिक प्रभावी बनाने से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम प्रशासनिक तंत्र को अधिक दक्ष और जनोन्मुखी बनाने में सहायक हो सकते हैं। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता से प्रशासनिक अनुभवों और कार्यप्रणालियों पर चर्चा का अवसर भी मिलेगा।

मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन को सरल, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाना है।

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उन्होंने कहा कि कर्मयोगी उत्तर प्रदेश अंत्योदय के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। अंत्योदय की अवधारणा के तहत समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्यमंत्री ने इसी लक्ष्य को विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका से जोड़कर प्रस्तुत किया।

उन्होंने विश्वास जताया कि क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने और लोक सेवकों की कार्यक्षमता को मजबूत करने में उपयोगी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं भी दीं।

विकसित भारत के लक्ष्य में उत्तर प्रदेश की भूमिका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को प्रशासनिक सुधारों, आर्थिक प्रगति और संस्थागत मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुशासन का उद्देश्य केवल प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने लोक सेवकों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, प्रशासनिक तंत्र की दक्षता और संवेदनशीलता से ही सरकारी योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री के इस बयान में एक ओर प्रदेश की साढ़े नौ वर्षों की विकास यात्रा को रेखांकित किया गया, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। सरकार की ओर से सुशासन, जनकल्याण और अंत्योदय के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

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