नई दिल्ली। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 11:56 बजे तक रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। पंचांग के अनुसार, इस दिन हर्षण योग शाम 5:21 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ऐसे में इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
25 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6:32 बजे और सूर्यास्त शाम 5:49 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 5:08 बजे तथा चंद्रास्त सुबह 6:25 बजे होगा।
इस दिन सूर्य स्वाति नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव हैं और इसके स्वामी राहु माने जाते हैं। इस नक्षत्र में सूर्य की स्थिति को स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और पुरानी परिस्थितियों से बाहर निकलकर आगे बढ़ने की भावना से जोड़कर देखा जाता है।
शाम 5:21 बजे तक रहेगा हर्षण योग
पंचांग के अनुसार, रविवार को हर्षण योग शाम 5:21 बजे तक रहेगा। ज्योतिष में इसे 27 नित्य योगों में 14वां योग माना जाता है। ‘हर्षण’ का अर्थ खुशी, आनंद और उत्साह से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं में इस योग को सकारात्मकता और प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त को दिन के शुभ समयों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण कार्य करना शुभ माना जाता है।
अमृतकाल: शाम 5:03 बजे से 6:34 बजे तक।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अमृतकाल को शुभ और मंगलकारी समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, नए कार्यों की योजना और महत्वपूर्ण गतिविधियां करने को अनुकूल माना जाता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय
पंचांग के अनुसार, रविवार को इन अशुभ माने जाने वाले कालों का समय इस प्रकार रहेगा:
- राहुकाल: शाम 4:24 बजे से 5:49 बजे तक
- यमगंड काल: दोपहर 12:10 बजे से 1:35 बजे तक
- गुलिक काल: दोपहर 3:00 बजे से 4:24 बजे तक
ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल और यमगंड के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। गुलिक काल को लेकर भी अलग-अलग परंपराओं में मान्यताएं प्रचलित हैं। इन समयों की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है।
रविवार को तुला राशि में रहेंगे सूर्य
इस दिन सूर्य तुला राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में तुला राशि को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य आत्मविश्वास, नेतृत्व और व्यक्तित्व का प्रतीक है। तुला राशि में सूर्य की स्थिति को निर्णय लेने, आत्मबल और कार्यक्षमता से जोड़कर देखा जाता है।
वहीं, चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, मीन राशि में चंद्रमा की स्थिति संवेदनशीलता, सहानुभूति, कल्पनाशीलता और आध्यात्मिक रुचि से संबंधित मानी जाती है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनके प्रभावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल
रविवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। पारंपरिक पंचांग के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा शुरू करना अशुभ माना जाता है। इसलिए धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाले लोग इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा से बचने या यात्रा से पहले परंपरागत उपाय करने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

