गीली मैली और चिकनी स्लज से लथपथ सड़क पर वाहन फिसलते रहे, हादसे होते रहे, लेकिन पेपर मिल मालिकों की जेबें भरती रहीं… अब नोटिस के डर से दौड़ा रहे JCB
मुजफ्फरनगर के भोपा रोड पर महीनों से पेपर मिलों की गीली स्लज और मैली ने सड़क को मौत का जाल बना रखा था। ट्रक-ट्रॉली से फैलती चिकनी मिट्टी ने राहगीरों की जान जोखिम में डाल दी। कोहरे में फिसलन बढ़ी तो हादसे रोज की कहानी बन गए, लेकिन फैक्ट्री मालिकों ने कान में तेल डाल रखा था।

19 पेपर मिलों पर आखिरकार शिकंजा
शिकायतों का अंबार और हादसों की बढ़ती संख्या ने आखिरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जगाया। 17 दिसंबर 2025 को विभाग ने भोपा रोड की 19 पेपर मिलों को नोटिस थमा दिया। तीन दिन में सड़क किनारे फैली मैली-स्लज हटाने का अल्टीमेटम दिया गया। चेतावनी साफ थी, “अगर हादसा हुआ तो पूरी जिम्मेदारी फैक्ट्री मालिकों की होगी!”

नोटिस पाने वाली फैक्टरियां
नोटिस मिलने वाली मिलें हैं—
- अग्रवाल डुप्लेक्स एंड बोर्ड मिल्स लिमिटेड
- बिंदल पेपर्स मिल्स लिमिटेड
- बिंदल डुप्लेक्स लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2)
- गर्ग डुप्लेक्स एंड पेपर मिल्स लिमिटेड
- मीनू पेपर्स प्राइवेट लिमिटेड
- पारिजात पेपर मिल्स
- शाकुंभरी पल्प एंड पेपर
- श्री भागेश्वरी पेपर मिल्स (यूनिट-1 और यूनिट-2)
- श्री वीर बालाजी पेपर्स (सीता पेपर्स)
- सिद्धबली पेपर्स मिल्स लिमिटेड
- सिल्वर टोन पल्प एंड पेपर (यूनिट-1 और यूनिट-2)
- सिल्वरटन पेपर लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2)
- टिहरी पल्प एंड पेपर्स लिमिटेड (यूनिट-1 और यूनिट-2)
- त्रिरूपति बालाजी फाइबर्स लिमिटेड
ये मिलें गीला कचरा बाहर फेंक रही थीं। ट्रक-ट्रॉली से दूर भेजते वक्त स्लज सड़क पर गिरती और फिसलन पैदा करती।
देर से जागा विभाग, पहले क्यों सोया?
स्थानीय प्रदूषण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने पहले भी चेतावनियां दी थीं, लेकिन फैक्ट्री मालिक टस से मस नहीं हुए। बुधवार को कई हादसे हुए, लोग घायल हुए। तब जाकर नोटिस जारी हुए। सवाल उठता है, हादसे होने का इंतजार क्यों किया गया?

नोटिस के बाद JCB की दौड़
नोटिस मिलते ही फैक्ट्री मालिक और प्रबंधक हरकत में आ गए। देर शाम से JCB मशीनें सड़क पर उतर गईं। गीली मैली और चिकनी मिट्टी हटाई गई। अब फिसलन काफी कम हो गई है। राहगीरों ने राहत की सांस ली।
पर्यावरण और सुरक्षा से खिलवाड़
ये मिलें न केवल सड़क को फिसलन भरा बना रही थीं, बल्कि वायु और जल प्रदूषण भी फैला रही थीं। गीला कचरा और स्लज से बदबू और बीमारियां फैल रही थीं। कोहरे में फिसलन से हादसे आम हो गए थे।

राहगीरों की राहत, लेकिन सवाल बाकी
अब सड़क साफ है, जाम और हादसे कम हुए हैं। लेकिन फैक्ट्री मालिकों पर सिर्फ नोटिस काफी है? क्या प्रदूषण और लापरवाही के लिए सख्त सजा नहीं होनी चाहिए? स्थानीय लोग कह रहे हैं, “यह सिर्फ शुरुआत है, अभियान जारी रहना चाहिए।”
प्रशासन की जिम्मेदारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की, लेकिन पहले की चेतावनियां अनसुनी क्यों रहीं? डीएम और एसएसपी को ऐसे उद्योगों पर सतत निगरानी रखनी चाहिए। भोपा रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।




