चंदन चौहान की प्रेस वार्ता में बुआ ने मंच ठुकराया, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने हाथ पकड़कर जबरदस्ती बैठाया!
मुजफ़्फ़रनगर। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र की मोरना सहकारी शुगर मिल की परेई क्षमता बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 261.91 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक मंजूरी मिली है।
इसकी घोषणा बिजनौर से रालोद सांसद चंदन सिंह चौहान ने की। इस मौके पर मोरना सहकारी शुगर मिल में सांसद चंदन चौहान ने रालोद के कैबिनेट मंत्री और नेताओं के साथ प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

“क्रेडिट लेने की होड़” और रूठीं “बुआ”
प्रेस वार्ता में मीरापुर विधानसभा की उपचुनाव में जीतकर आई रालोद की विधायक मिथिलेश पाल पहुंचीं, लेकिन उनके फोटो का होर्डिंग-बैनर पर न होने से वह खुलकर रूठ गईं।
सांसद चंदन चौहान के बुलाने पर भी मंच पर जाने से साफ इनकार कर दिया। रालोद के नेताओं के साथ चौधरी चरण सिंह और चंदन चौहान के दादा-पिता की फोटो पर माल्यार्पण भी नहीं किया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री योगराज सिंह के निवेदन पर बाद में अकेले ही चित्रों पर माल्यार्पण किया।

कैबिनेट मंत्री ने हाथ पकड़कर मनाया
मंच से उतरकर कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार विधायक मिथिलेश पाल का हाथ पकड़कर मंच पर ले गए और जबरदस्ती अपने साथ बैठाया। जब मंत्री उन्हें बुलाने आए तो उनके समर्थकों ने साफ इनकार कर दिया कि “विधायक जी आप यहीं बैठे रहो, वहां मत जाओ जब उन्होंने फोटो नहीं लगाया है।”
जिला अध्यक्ष ने होर्डिंग उतरवाए, फिर भी विवाद
प्रेस वार्ता शुरू होने से पहले ही रालोद के जिला अध्यक्ष संदीप मलिक ने आसपास लगे एक-दो होर्डिंग उतरवाए थे क्योंकि उनमें मिथिलेश पाल का फोटो नहीं था।

उसके बाद भी जब सांसद चंदन सिंह चौहान का फोटो वाला बैनर मंच पर लगाया जा रहा था तो उसे रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चंदन चौहान के कार्यकर्ताओं ने बैनर मंच पर लगा दिया। इससे मीरापुर विधायक और रालोद के नेताओं का एक दल नाराज रहा।
“क्रेडिट” के लिए “पोस्टर वार”
इतना ही नहीं, जब सरकार द्वारा मोरना सहकारी शुगर मिल की परेई क्षमता बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 261.91 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक मंजूरी दी गई तो सांसद चंदन सिंह चौहान और विधायक मिथलेश पाल के बीच क्रेडिट लेने की होड़ मच गई।

दोनों की तरफ से पोस्टर–बैनर बनवाकर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कराए गए। सांसद चंदन सिंह चौहान इसे अपनी और विधायक मिथलेश पाल अपनी उपलब्धि दर्शाने में जुट गए। शायद ये ही वजह रही कि दिलों की तकरार मंच पर देखने को मिल गई।

सांसद-विधायक में समन्वय की कमी साफ
यह घटना साफ दर्शाती है कि सांसद चंदन चौहान और विधायक मिथिलेश पाल के बीच समन्वय नहीं है। चंदन चौहान मीरापुर से विधायक थे और विधायक रहते ही बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद सीट खाली हुई।
कयास लगाए जा रहे थे कि मीरापुर से चंदन की पत्नी यशिका सिंह चौहान को टिकट मिलेगा, लेकिन बहुत कम समय में टिकट बदलकर मिथिलेश पाल को दिया गया और वह जीत गईं। उसके बाद से दोनों नेताओं के बीच आपसी तालमेल नहीं बन पाया है, जो आज सबके सामने आ गया है।



