मुजफ्फरनगर में 14 साल पुराने एक बेहद संवेदनशील अपहरण के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 28 अगस्त 2011 को अपनी मौसी के घर आए अरशद का पुरानी रंजिश को लेकर हत्या के इरादे से अपहरण किया गया था।
आरोपी नौशाद को अपर जिला सत्र न्यायाधीश-3 रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने उम्रकैद और एक लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है।
शासकीय अधिवक्ता ने की पैरवी
मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश-3 रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार ने पैरवी की।
कोर्ट ने तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी नौशाद को दोषी करार दिया।
मौसी के घर गया था अरशद
अभियोजन पक्ष के अनुसार अरशद अपनी मौसी वहीदन के घर गया था। वह वापस नहीं लौटा। वहीदन के बेटे नौशाद ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या के इरादे से उसका अपहरण कर लिया था।
मामले में गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने नौशाद को धारा 364 (हत्या के इरादे से अपहरण) के तहत दोषी करार दिया।
उम्रकैद और जुर्माने की सजा
कोर्ट ने आरोपी नौशाद को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला 14 साल बाद आया है, जिससे पीड़ित परिवार में राहत की सांस ली जा रही है।
इस दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त सजा सुनाई है।
इलाके में फैसले की चर्चा
फैसले के बाद इलाके में इस मामले की खूब चर्चा हो रही है। 2011 का यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा था।
अब उम्रकैद की सजा से आरोपी नौशाद की जिंदगी जेल में ही गुजरेगी। पीड़ित पक्ष ने न्याय मिलने पर राहत जताई है।


