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व्हाइट हाउस की चौखट पर बरसी दौलत: क्रिप्टो की कमाई पर घिरे ट्रंप ने विरोधियों को लपेटा, बोले- हमारे रसूख से दुनिया को है दिक्कत

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वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पारिवारिक व्यापार और उससे जुड़े हितों के टकराव के गंभीर आरोपों पर एक बार फिर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। ओवल ऑफिस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने व्यावसायिक साम्राज्य का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि उनके बच्चे उनके राजनीति में आने से बहुत पहले से ही व्यापार के क्षेत्र में स्थापित हैं। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज उनके बच्चों को महज इसलिए कड़ी और दुर्भावनापूर्ण जांच का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे राष्ट्रपति के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। ट्रंप ने तर्क दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का पद इतना अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली होता है कि उनके बच्चे अगर कोई वैध काम भी करते हैं, तो उसे जबरन हितों का टकराव मान लिया जाता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह तीखा बयान उनकी वर्ष 2025 की वार्षिक वित्तीय प्रकटीकरण रिपोर्ट (फाइनेंशियल डिस्क्लोजर रिपोर्ट) के सार्वजनिक होने के ठीक बाद आया है। इस आधिकारिक रिपोर्ट के सामने आने के बाद से ही अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि व्हाइट हाउस की सत्ता में दोबारा कदम रखने के पहले ही साल यानी 2025 में ट्रंप ने अपने पारिवारिक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर के माध्यम से 580 मिलियन डॉलर से अधिक की रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। इसी भारी-भरकम मुनाफे को लेकर विपक्षी दल उनकी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।

क्रिप्टो वेंचर में कुछ भी गलत नहीं, राष्ट्रपति की नीतियां हर जगह असर डालती हैं

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सीएनबीसी चैनल को दिए इस विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने वित्तीय शुचिता के सवाल पर पूरी तरह से बेबाक राय रखी। उन्होंने तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एक देश के राष्ट्रपति की नीतियां राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग हर छोटे-बड़े हिस्से पर अपना प्रभाव डालती हैं। इसका यह मतलब कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनका परिवार पूरी तरह से हाथ पर हाथ धरे बैठ जाए। ट्रंप ने कहा कि उनके बच्चों की अपनी स्वतंत्र व्यावसायिक जिंदगी है और इस क्रिप्टो वेंचर के पूरे लेन-देन में कुछ भी गैरकानूनी, अनैतिक या गलत नहीं किया गया है।

हितों के टकराव से जुड़े अमेरिकी संघीय कानूनों की व्याख्या करते हुए ट्रंप ने खुद का बचाव किया। उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के लिए उन प्रशासनिक या सरकारी फैसलों से खुद को अलग रखना कानूनी रूप से बिल्कुल जरूरी नहीं है, जो उनके व्यक्तिगत वित्तीय हितों को प्रभावित कर सकते हों। इस बातचीत के दौरान ट्रंप ने केवल अपने पारिवारिक व्यवसाय पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था, वैश्विक बाजार, ईरान नीति, फेडरल रिजर्व के रुख और आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों जैसे कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अपनी राय खुलकर सामने रखी।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने बढ़ाई कमांडर-इन-चीफ की ताकत

साक्षात्कार के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप से अमेरिकी इतिहास के उनके पसंदीदा राष्ट्रपतियों या किसी विशेष स्वर्णिम काल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह सीधे जवाब देने के बजाय अपने प्रतिद्वंद्वी पूर्व राष्ट्रपतियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी इतिहास में कुछ बहुत ही कमजोर और बुरे राष्ट्रपति भी रहे हैं, जिन्होंने देश की साख को नुकसान पहुंचाया। इसी कड़ी में उन्होंने देश की शीर्ष अदालत यानी उच्चतम न्यायालय के उस हालिया फैसले की जमकर तारीफ की, जिसने राष्ट्रपति पद की शक्तियों को और अधिक सुदृढ़ किया है। इस फैसले के बाद अब कमांडर-इन-चीफ को कार्यपालिका के अधीन आने वाली स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के सदस्यों को सीधे बर्खास्त करने का अधिकार मिल गया है।

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ट्रंप ने कहा कि शीर्ष अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले ने निश्चित रूप से राष्ट्रपति की प्रशासनिक शक्तियों का दायरा बहुत अधिक बढ़ा दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति का यह पद हमेशा से ही दुनिया का सबसे मजबूत और रसूखदार ओहदा रहा है। उन्होंने अन्य देशों की शासन प्रणालियों से तुलना करते हुए कहा कि दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों के पास वैसी कार्यकारी और संवैधानिक ताकतें नहीं होतीं, जैसी शक्तियां अमेरिकी राष्ट्रपति को प्राप्त हैं। ट्रंप ने गर्व से कहा कि उनके प्रशासन के प्रयासों के चलते आज पूरी दुनिया में एक देश के रूप में अमेरिका का सम्मान वापस लौटा है। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि महज डेढ़ साल पहले तक दुनिया के कई देश हमारी नीतियों पर हंसते थे, लेकिन आज वैश्विक पटल पर अमेरिका की धाक फिर से जम चुकी है।

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