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योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: जलालाबाद अब कहलाएगा ‘परशुरामपुरी’, होमगार्डों को कैशलेस इलाज और नई स्टार्टअप नीति को भी मंजूरी

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोक भवन में आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगी है। मंत्रिमंडल की इस बैठक में शाहजहांपुर जनपद के ऐतिहासिक कस्बे जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ किए जाने के बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव समेत कुल 28 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट बैठक में कुल 29 प्रस्ताव चर्चा के लिए रखे गए थे, जिनमें से मदरसा शिक्षा से जुड़े एक प्रस्ताव को फिलहाल अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया। सरकार के इस फैसले से जहां सांस्कृतिक धरोहरों को नया सम्मान मिला है, वहीं युवाओं, होमगार्डों, पशुपालकों और खिलाड़ियों के हित में भी बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए हैं।

भगवान परशुराम की जन्मस्थली को मिला नया नाम

कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को ब्रीफिंग देते हुए वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि शाहजहांपुर के जलालाबाद क्षेत्र को भगवान परशुराम की पावन जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इसका नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इस संबंध में केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त होने के बाद सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। इसके अतिरिक्त कैबिनेट ने प्रदेश के करीब एक लाख साठ हजार होमगार्डों और उनके आश्रितों को बड़ी सौगात देते हुए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखा दी है।

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति दो हजार छब्बीस को हरी झंडी

राज्य में नवाचार, रोजगार और उद्यमिता को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026’ और ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ के गठन को मंजूरी दी है। इस मिशन को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत संचालित किया जाएगा, जिसकी कमान मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली संचालन समिति के हाथों में होगी। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करने के लिए सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम स्टार्टअप फंड की व्यवस्था की है। इसके तहत युवाओं को प्रोटोटाइप, सीड कैपिटल सहायता और इनक्यूबेटरों को वार्षिक अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, समय सीमा समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को भी राज्य में दोबारा प्रभावी रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है।

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पशुपालकों, श्रमिकों और खिलाड़ियों के लिए बड़े निर्णय

कैबिनेट मंत्री ने आगे बताया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देने के लिए ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ लागू की जाएगी। इस योजना के तहत होने वाले पशु बीमा के प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार खुद उठाएगी, जबकि मात्र 15 प्रतिशत हिस्सा पशुपालक को देना होगा। इसके अलावा श्रम विभाग के प्रस्ताव पर वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना और गोरखपुर व मुरादाबाद में सौ-सौ बेड के ईएसआईसी अस्पतालों के लिए निशुल्क भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। इस मेडिकल कॉलेज की आधी सीटें श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। खेल जगत को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों की सीधी भर्ती नियमावली में संशोधन किया है, जिससे अब पात्र खिलाड़ियों को समूह ‘ख’ और ‘ग’ के पदों पर सीधे सरकारी नौकरी मिल सकेगी।

तीन नए विश्वविद्यालयों की स्थापना को हरी झंडी

शिक्षा क्षेत्र का विस्तार करते हुए कैबिनेट ने प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के प्रस्तावों को भी पारित किया है। इनमें बिल्हौर में महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय, गाजियाबाद में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय और फतेहपुर में ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके साथ ही रायबरेली में एक नए उद्यान महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की पेंशन नियमावली में संशोधन तथा गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगमों के विकास कार्यों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने जैसे कई अन्य प्रशासनिक व जनहितैषी प्रस्तावों को कैबिनेट द्वारा अपनी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।

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